भारतकोश
विष्णु पुराण

विष्णु पुराण

Vishnu Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished558 पृष्ठ

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३०० * श्रीविष्णुपुराण * [ अ० २०

बाह्लीकात्सोमदत्तः पुत्रोऽभूत् ॥ ३१ ॥बाह्लीकके सोमदत्त नामक पुत्र हुआ तथा सोमदत्तके
सोमदत्तस्यापि भूरिभूरिश्रवःशल्यसंज्ञास्त्रयः पुत्राभूरि, भूरिश्रवा और शल्य नामक तीन पुत्र
बभूवुः ॥ ३२ ॥ शान्तनोरप्यमरनद्यां जाह्नव्या-हुए ॥ ३१-३२ ॥ शान्तनुके गंगाजीसे अतिशय कीर्तिमान्
मुदारकीर्तिरशेषशास्त्रार्थविद्भीष्मः पुत्रो-तथा सम्पूर्ण शास्त्रोंका जाननेवाला भीष्म नामक पुत्र
ऽभूत् ॥ ३३ ॥ सत्यवत्यां च चित्राङ्गदविचित्रवीर्यौहुआ ॥ ३३ ॥ शान्तनुने सत्यवतीसे चित्रांगद और विचित्रवीर्य
द्वौ पुत्रावुत्पादयामास शान्तनुः ॥ ३४ ॥नामक दो पुत्र और भी उत्पन्न किये ॥ ३४ ॥ उनमेंसे
चित्राङ्गदस्तु बाल एव चित्राङ्गदेनैव गन्धर्वेणाहवेचित्रांगदको तो बाल्यावस्थामें ही चित्रांगद नामक गन्धर्वने
निहतः ॥ ३५ ॥ विचित्रवीर्योऽपि काशिराजतनयेयुद्धमें मार डाला ॥ ३५ ॥ विचित्रवीर्यने काशिराजकी
पुत्रिका-धर्मानुसार बभ्रुवाहन नामक एक पुत्र उत्पन्न
अम्बिकाम्बालिके उपयेमे ॥ ३६ ॥ तदुपभोगाति-पुत्री अम्बिका और अम्बालिकासे विवाह किया ॥ ३६ ॥
खेदाच्च यक्ष्मणा गृहीतः स पञ्चत्वम-उनमें अत्यन्त भोगासक्त रहनेके कारण अतिशय खिन्न
गमत् ॥ ३७ ॥ सत्यवतीनियोगाच्च मत्पुत्रः कृष्ण-रहनेसे वह यक्ष्माके वशीभूत होकर [अकालहीमें] मर
द्वैपायनो मातृवचनमनतिक्रमणीयमिति कृत्वागया ॥ ३७ ॥ तदनन्तर मेरे पुत्र कृष्णद्वैपायनने सत्यवतीके
विचित्रवीर्यक्षेत्रे धृतराष्ट्रपाण्डू तत्प्रहित-नियुक्त करनेसे माताका वचन टालना उचित न जान
भुजिष्यायां विदुरं चोत्पादयामास ॥ ३८ ॥विचित्रवीर्यकी पत्नियोंसे धृतराष्ट्र और पाण्डु नामक दो
पुत्र उत्पन्न किये और उनकी भेजी हुई दासीसे विदुर
नामक एक पुत्र उत्पन्न किया ॥ ३८ ॥
धृतराष्ट्रोऽपि गान्धार्या दुर्योधनदुःशासनप्रधानंधृतराष्ट्रने भी गान्धारीसे दुर्योधन और दुःशासन
पुत्रशतमूत्पादयामास ॥ ३९ ॥ पाण्डोरप्यरrootण्येआदि सौ पुत्रोंको जन्म दिया ॥ ३९ ॥ पाण्डु वनमें
मृगयायामृषि शापोपहतप्रजाजननसामर्थ्यस्य धर्म-आखेट करते समय ऋषिके शापसे सन्तानोत्पादनमें
वायुशक्रैर्य्युधिष्ठिरभीमसेनार्जुनाः कुन्त्यांअसमर्थ हो गये थे अतः उनकी स्त्री कुन्तीसे धर्म,
नकुलसहदेवौ चाश्विभ्यां माद्र्यां पञ्चपुत्रा-वायु और इन्द्रने क्रमशः युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन
स्समुत्पादिताः ॥ ४० ॥ तेषां च द्रौपद्यां पञ्चैवनामक तीन पुत्र तथा माद्रीसे दोनों अश्विनीकुमारोंने
पुत्रा बभूवुः ॥ ४१ ॥ युधिष्ठिरात्प्रतिविन्ध्यःनकुल और सहदेव नामक दो पुत्र उत्पन्न किये। इस
प्रकार उनके पाँच पुत्र हुए ॥ ४० ॥ उन पाँचोंके द्रौपदीसे
पाँच ही पुत्र हुए ॥ ४१ ॥ उनमेंसे युधिष्ठिरसे प्रतिविन्ध्य,भीमसेनाच्छुतसेनः श्रुतकीर्तिरर्जुनाच्छुतानीको
भीमसेनसे श्रुतसेन, अर्जुनसे श्रुतकीर्ति, नकुलसे श्रुतानीकनकुलाच्छ्रतकर्म सहदेवात् ॥ ४२ ॥
तथा सहदेवसे श्रुतकर्मका जन्म हुआ था ॥ ४२ ॥
अन्ये च पाण्डवानामात्मजास्तद्यथा ॥ ४३ ॥इनके अतिरिक्त पाण्डवोंके और भी कई पुत्र
यौधेयी युधिष्ठिराद्देवकं पुत्रमवाप ॥ ४४ ॥हुए ॥ ४३ ॥ जैसे-युधिष्ठिरसे यौधेयीके देवक नामक
हिडिम्बा घटोत्कचं भीमसेनात्पुत्रं लेभे ॥ ४५ ॥पुत्र हुआ, भीमसेनसे हिडिम्बाके घटोत्कच और काशीसे
काशी च भीमसेनादेव सर्वगं सुतमवाप ॥ ४६ ॥सर्वग नामक पुत्र हुआ, सहदेवसे विजयाके सुहोत्रका
सहदेवाच्च विजया सुहोत्रं पुत्रमवाप ॥ ४७ ॥जन्म हुआ, नकुलने रेणुमतीसे निरमित्रको उत्पन्न
रेणुमत्यां च नकुलोऽपि निरमित्रमजीजनत् ॥ ४८ ॥किया ॥ ४४-४८ ॥ अर्जुनके नागकन्या उलूपीसे इरावान्
अर्जुनस्याप्युलूप्यां नागकन्यायामिरावान्नामनामक पुत्र हुआ ॥ ४९ ॥ मणिपुर नरेशकी पुत्रीसे अर्जुनने
पुत्रोऽभवत् ॥ ४९ ॥ मणिपुरपतिपुत्र्यां पुत्रिका-पुत्रिका-धर्मानुसार बभ्रुवाहन नामक एक पुत्र उत्पन्न
धर्मेण बभ्रुवाहनं नाम पुत्रमर्जुनोऽजनयत् ॥ ५० ॥किया ॥ ५० ॥ तथा उसके सुभद्रासे अभिमन्युका जन्म
सुभद्रायां चार्भकत्वेऽपि योऽसावतिबलपराक्रम-हुआ जो कि बाल्यावस्थामें ही बड़ा बल-पराक्रम-
स्समस्तारातिरयजेता सोऽभिमन्युरजायत ॥ ५१ ॥सम्पन्न तथा अपने सम्पूर्ण शत्रुओंको जीतनेवाला था ॥ ५१ ॥

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