विष्णुधर्मोत्तर पुराण (तृतीय खण्ड - चित्रसूत्र, वास्तु, शिल्प व प्रतिमा लक्षण)

विष्णुधर्मोत्तर पुराण (तृतीय खण्ड - चित्रसूत्र, वास्तु, शिल्प व प्रतिमा लक्षण)
Vishnudharmottara Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (सम्पादक: डॉ. प्रियबाला शाह) द्वारा
स्रोत: Sri Vishnu Dharmottara Mahapuranam 1000p Classic Edition (उद्गम)
DevanagariHindipublished1,001 पृष्ठ
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| वि० ध० | अनु० | |||||
|---|---|---|---|---|---|---|
| ॥१०॥ |
| अध्यायाः | विषयाः | पत्राङ्काः | पृष्ठाङ्काः | अध्यायाः | विषयाः | पत्राङ्काः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| १८ | राज्याभिषेककालिकनिर्णयः ... | १८० | २ | ३३ | साध्वीप्रशंसामिधानम् ... | १९६ | १ |
| १९ | पुरन्दरशान्तिवर्णनम् ... | ,, | ,, | ३४ | पतिव्रताकर्तव्यवर्णने मूलकर्म- (मन्त्रतन्त्रवशीकरणादि)-निन्दा | ,, | २ |
| २० | शुभलक्षणविप्रकथनम् ... | १८१ | १ | ३५ | स्त्रीदण्डताडनादिनिरूपणम् ... | १९७ | २ |
| २१ | राज्याभिषेकविविधवर्णनम् ... | ,, | ,, | ३६ | सावित्र्युपाख्याने सावित्रीसत्यवतोर्गन्धनार्थं वनगमनम् ... | १९९ | १ |
| २२ | अभिषेकमन्त्रवर्णनम् ... | १८२ | १ | ३७ | काष्ठानि पाटयतः सत्यवतः शिरोवेदनया पंचत्वे यमेन तस्य लिंगशरीरस्य नयनं सावित्र्याश्च तदनुगमनञ्चादर्श विलोक्य यमेन वरदानम् | ,, | ,, |
| २३ | तीर्थफलवर्णनम् ... | १८५ | २ | ३८ | सावित्रीपमोपाख्याने सावित्र्यै महोदरभ्रातृशतप्राप्तिवरदानम् ... | २०० | १ |
| २४ | शूरकुलीनबलवन्नाङ्गादिसम्पद्युक्तसहायवरणप्रसंगे सेनापतिप्रतीहारहस्तिक्षा निधिविग्रहकेलेखकखड्गधारिकोशध्यारि सारथिसदस्य क्षमधर्माध्यक्षादिराजकार्यसहायकनिरूपणम् | १८६ | १ | ३९ | सावित्र्यै यमेनशूरशतपुत्रप्राप्तिवरदानम् ... | २०१ | १ |
| २५ | राजानुजीविपवर्णनम् ... | १८७ | २ | ४० | सावित्रीस्तुतितुष्टयमेन सत्यवतः परित्यक्तगात्रस्या आयुर्वान्ते स्वर्गभोगप्राप्तिवरदानम् ... | ,, | ,, |
| २६ | दुर्गसम्पत्तिवर्णनम् ... | १८८ | १ | ४१ | प्राप्तजीवनः सत्यवान् सावित्र्या सह गृहं गतः, तंत्पिता लब्धचक्षुर्मूत्वा राज्यमपि लेभे ... | ,, | ,, |
| २७ | रक्षोघ्नविद्यौषधादिधारणम् ... | १९० | १ | ४२ | राज्ञा सदा गोपालनं कर्तव्यं, गोग्रासप्रदानगोप्रेमनतदनुगमनतदर्तिहरणादिमाहात्म्यवर्णनम् ... | ,, | ,, |
| २८ | विषदातृलक्षणं विषसंसृष्टान्नपरीक्षणादि ... | ,, | २ | ४३ | गोचिकित्सावर्णनम् ... | २०३ | |
| २९ | गृहादिनिर्माणाय भूमिपरीक्षणाग्निइत्यादिकरणावास्तुदेवतादिग्विभागवृक्षशुभाशुभविचारशालान्यासादिवास्तुविद्यावर्णनम् | १९२ | २ | ४४ | गोशान्तिकर्मभवेर्गोनाधवृक्चुद्कंपदंश्यप्रभृतिनिन्द्यागववर्णनम् | २०४ | |
| ३० | गृहोचितदिषु वृक्षरोपणसुद्यानकूपवाप्यादिनिर्माणं फलपुष्पसम्पत्तये भैषज्यदोहने वृक्षायुर्वेदादि च ... | १९३ | २ | ४५ | मन्थे अश्वप्रशंसा, अश्वितैषु तद्वैद्यवतःमङ्गलम | २०५ | |
| ३१ | देवतागृहेलेपनानन्तरंमाल्यानुलेपनपताकादानपूजनादिमाहात्म्यकथनपुरस्सरं देवद्रव्यापहरणादिदोषकथनम् | १९४ | १ | ४६ | अश्वचिकित्सा ... | ||
| ३२ | ब्राह्मणमाहात्म्यवर्णनम् ... | १९५ | १ | ४७ | अश्वशान्तिः ... | २०६ | |
| ४८ | गजप्रशंसा, हस्तिषु तेषु गजनाशः | २०७ | |||||
| ४९ | हस्तिचिकित्सा ... | ,, |