विष्णुधर्मोत्तर पुराण (तृतीय खण्ड - चित्रसूत्र, वास्तु, शिल्प व प्रतिमा लक्षण)

विष्णुधर्मोत्तर पुराण (तृतीय खण्ड - चित्रसूत्र, वास्तु, शिल्प व प्रतिमा लक्षण)
Vishnudharmottara Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (सम्पादक: डॉ. प्रियबाला शाह) द्वारा
स्रोत: Sri Vishnu Dharmottara Mahapuranam 1000p Classic Edition (उद्गम)
DevanagariHindipublished1,001 पृष्ठ
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वि० ध० ॥ १२ ॥
| अध्यायाः | विषयाः | पत्रांकाः | पृष्ठांकाः |
|---|---|---|---|
| १५० | धातुपृथ्ववर्णनम् .... | २८१ | १ |
| १५१ | राज्याङ्गिकवर्णनम् .... | " | २ |
| १५२ | जन्मऋक्षक्षालनुष्पस्नानसूर्यप्रणमितिक्तर्कपूपूर्णत्वबालेंदुपू-नादीनि राजकर्म्माणि .... | २८३ | १ |
| १५३ | राज्ञश्छात्रोत्पत्तिविविधवर्णनम् .... | " | २ |
| १५४ | शक्रध्वजोत्थापितकन्यपुरस्सरं तन्महोत्सवकर्तुः संग्रामे जयः | २८४ | १ |
| १५५ | शक्रध्वजमहौत्सवकालोविधिकलादिकथनम् .... | " | २ |
| १५६ | इन्द्रध्वजपतनभङ्गदिशादिफलवर्णनम् .... | २८५ | २ |
| १५७ | शक्रध्वजारोपणप्रसङ्गेन स्तावकमन्त्राः | ||
| १५८ | आश्विनशुक्लारम्भ्यां निशिरीतरे भद्रकालीगृहं निर्म्माय पटे भद्रकालीं सम्पूज्याष्टम्यां छत्रचर्म्माद्यायुधानि पूजयेत् .... | २८६ | १ |
| १५९ | हस्त्यादीनांराजशान्तिविधिः .... | २८७ | २ |
| १६० | छत्राश्वध्वजपताकाखड्गवर्मदुन्दुभ्यादिमन्त्राः .... | २८८ | २ |
| १६१ | राज्याभिषेकिरणं वृत्तकन्यलशान्तिकर्म्म .... | ||
| १६२ | संवत्सराभिषेकः .... | २८९ | १ |
| १६३ | यात्रायां शकुनविधानम् .... | २९१ | १ |
| १६४ | " " " .... | २९१ | २ |
| १६५ | शुभाशुभस्वप्नफलम् .... | " | |
| १६६ | ज्योतिषशास्त्रेण शास्त्रज्ञाक्षणावर्णनम् .... | ||
| १६७ | कालमानादिग्राह्यं स्वरूपसमवर्गग्रहसैन्यादिनामितामसंज्ञाताजावबायवक्कथनम्, मासाधिपचलादिश्रवणादृष्टदोषग्रहेणाहार्विचारस्मरणाकारणादृष्टनगराजयोगोद्देश कथनम् .... | २९२ (पृष्ठांकः २) | |
| १६८ | सौरादिदिवससत्ययुगादिमानकल्पग्रहमन्दोच्चशीघ्रोच्चादिगतेरयनसंपाताद्ययनगत्यादिसाधनक्रान्तिशरासाधनलग्नमानयतनलग्नतद्भुक्तभोग्यादिस्फुटदिनकेन्द्रादिकेन्द्रिाद्वर्णनम् | २९० (पृष्ठांकः १) | |
| १६९ | इष्टकालान्मरीचितचन्द्राद्हस्साधनाहणगणनार्य्याधिपमासाधिपनादिनाधंष्यानगत्रकालपातकालमंषतग्णाद्दानयनतद्दोषविधिस्रपाचिश्रपाकोदयग्रहसुप्त्यादिवर्णनम् .... | २९१ (पृष्ठांकः २) | |
| १७० | नक्षत्रातिध्रुवगाणानयनप्रकारः .... | २९८ (पृष्ठांकः २) | |
| १७१ | छेदशंकुच्छायादिवसाध्नमस्र गतेशेषज्ञानम् | ||
| १७२ | लंबोदककालज्ञानवर्णनम् | ||
| १७३ | ग्रहोदयास्तग्रहागस्त्याद्यनप्रोतितंविदेसोस्मीत्यादिज्ञानम् | ||
| १७४ | ग्रहणाकालकर्णचन्द्रायांश्रुकृतलक्षणतद्भवनवार्ता स्फुटदशग्गम्म्भीद्रांसनीत्यादिसाधने ग्रहणिज्ञानानुभूतवर्णनञ्च .... | २९९ (पृष्ठांकः १) | |
| १७५ | पौष्यादिविद्यो यायिविधद्वले गजयात्रायाः श्रेष्ठा. शुक्राक्रान्तायां नविपेयः, यात्रांपश्चानिमाश्रदिवसनक्षत्राङ्गीहगान्त्रनिवारिणीयांडियांगक्तव्यमुत्तरं जन्मग्नशुपथयात्रायां यात्रायाः सिद्धिर्भवत्यस्य | ||
| १७६ | राज्ञां विजययात्रार्थं शुभवक्तं विधायं तद्दिनान्मन्नगरप्रवृतंवेदांयविधिवर्णनपुरस्सरं यात्रादिवसे त्रिविक्रमं सम्पूज्य होममानन्तरं घृतवेक्षणस्नादिपटनपूर्वकं दिङ्नक्षत्रयांतव्यं दत्त्वा किञ्चिभ्राम्य गायतून... | ३०० (पृष्ठांकः १) | |
| १७७ | वस्त्रशालोद्यरगणरत्नकश्च्यान्दिनिविन्यानुकर्म्मं युद्ववर्णनम् | ३०१ (पृष्ठांकः २) |
अनु० ॥ १२ ॥