विष्णुधर्मोत्तर पुराण (तृतीय खण्ड - चित्रसूत्र, वास्तु, शिल्प व प्रतिमा लक्षण)

विष्णुधर्मोत्तर पुराण (तृतीय खण्ड - चित्रसूत्र, वास्तु, शिल्प व प्रतिमा लक्षण)
Vishnudharmottara Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (सम्पादक: डॉ. प्रियबाला शाह) द्वारा
स्रोत: Sri Vishnu Dharmottara Mahapuranam 1000p Classic Edition (उद्गम)
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| ३५ | तपस्यता नारायेणाप्सरोदर्शमंगाय चित्रकर्मणाऽऽदर्शं निर्माय विश्वकर्मणे तत्कर्मांशार्पणं, तन्नानुसारं चित्रेपि त्रैलोक्यानुकर्षण-दृष्टिभावांगोपांगकरणविन्यासादिकरणम्, हंसादिपञ्चपुरुषलक्षणानि च | ३३१ | २ | ४३ | चित्रे शृंगारादिनवरसमदर्शनं, देवालयनृपसभामारोस्तद्मशं, निधिविद्याधरगुह्यकदिमंगलिहार्याचित्राणां गृहेषु यत्रालोहेवने स्वरंगरेनामसगृहे चित्रलेखनेनपिचित्रदंशेषगुणवर्णनम, चित्रसूत्रसमाप्तिः | ३३७ | १ |
| ३६ | चित्रसूत्रवर्णने सूर्यमवयवममान तदनुसारेण मधुकंसभाल्मल्यादिवर्णनम् | ३३२ | १ | ४४ | ब्रह्मविष्णुशंकरादिचित्रनिर्माणनियमवर्णनम् | ” | २ |
| ३७ | चित्रकर्मण्यंगप्रत्यंगमानेन स्त्रीणां निर्माणम् | ” | २ | ४५ | विष्णुप्रजाभ्योऽध्यक्षनिर्माणवर्णनम् | ३३८ | १ |
| ३८ | चित्रकर्मणि देवतानांनेत्राद्यंगवर्णनम् | ” | ” | ४६ | अष्टपस्यापि देवस्य विक्रितिवशात्साङ्गाता, तत्र च ब्रह्मणः संह्तुकं चतुर्वक्तादिभििरूपणम् | ” | २ |
| ३९ | नानावर्णोत्पत्ताः शुभाकारविहारा ऋजुवागतासाचीकृतदेहत्वोनेकोपवेधसहिताश्चित्रकर्मणो नव भेदाः ( वर्ण ) | ३३३ | १ | ४७ | विष्णुरूपनिर्माणॆ चतुर्बाहूनाम्बांतुरूपत्वं, चतुर्वक्राणामञ्च बलक्षानेश्वर्यशक्तिरूपता, वलस्यापि वासुदेवसङ्कर्षणप्रद्युम्नानिरुद्धा, वासुदेवस्य प्रमिक्तवे सूर्यचन्द्ररूपं काद्युद्गम्, संकर्षणदिरूपाणामपि मुसलाङ्गिलाद्यायुधतादिवर्णनम् | ” | ” |
| ४० | चित्रकर्मभूमिसंस्कारकथनपूर्वकं बहुसमयस्थायिरंग निर्माणं, कनकजातादिगद्रव्यकथनञ्च | ३३४ | २ | ४८ | महादेवस्य सद्योजातवामदेवादिभेदेन पञ्चरूपाणि प्रतिवक्रे सोमसूर्याग्निनेत्रत्रयत्वम्, सूक्ष्मादितत्त्वानि, विशुद्धज्ञानवैराग्यादीनामादर्शदिक्पती | ३३९ | १ |
| ४१ | सत्यवैणिकादिभेदेन सलक्षणं चित्रचातुर्विध्यम्, पत्राकृतिक्रान्तिविन्दुवर्तनादिचित्रदोषस्थानप्रमानमाणादिचित्रभूषणगुणासनादिचित्रनाशहेतुभूमादिवर्णनञ्च | ३३६ | १ | ४९ | नासत्यरूपनिर्माणम्.... | ” | २ |
| ४२ | चित्रे देवनृपपिंगोश्वदैत्यदानवादीनां सायुधानां सपरिच्छदानां निर्माणदेशविशेषावुरुवासनशयनयानवेशस्तित्सागरावरोहणशैलशिखरपक्षीभूमण्डलञ्चक्रप्रम्हादीनिधिसचन्द्रनक्षत्रराजिसन्ध्यादिनिर्माणम् | ” | २ | ५० | दक्षप्रजापतिनिर्माणं सहेतुकम् .... | ” | ” |