विष्णुधर्मोत्तर पुराण (तृतीय खण्ड - चित्रसूत्र, वास्तु, शिल्प व प्रतिमा लक्षण)

विष्णुधर्मोत्तर पुराण (तृतीय खण्ड - चित्रसूत्र, वास्तु, शिल्प व प्रतिमा लक्षण)
Vishnudharmottara Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (सम्पादक: डॉ. प्रियबाला शाह) द्वारा
स्रोत: Sri Vishnu Dharmottara Mahapuranam 1000p Classic Edition (उद्गम)
DevanagariHindipublished1,001 पृष्ठ
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वि० ध०
॥३॥
| अध्यायाः | विषयाः | पत्राङ्काः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| १७ | मन्त्रब्राह्मणकल्पपुराणकथनपुरस्सरं नाटकनाटिकाप्रकरणप्रकरणीसमवकारोहामृगादिदशरूपकलक्षणकथनपुरस्सरं नायकानाथिकाभेदशृङ्गारादिरसवर्णनम् .... | ३१६ | १ |
| १८ | गीतकयोः कण्ठशिरःस्थानैर्यथा मन्द्रादिस्वरोत्पत्तिः, ग्रामत्रयं, सप्तस्वराः, एकविंशतिसूर्च्छनाः, एकोनपञ्चाशत्तानाः, वृत्तित्रयम्, शृङ्गारादिनवरसानां ग्रामविभागः, दशलक्षणा जातयश्चतारोह्यलंकाराः, अपरान्तकादिगीतानि चेतिगीतलक्षणवर्णनम् .... | ३१७ | १ |
| १९ | ततः सुप्रीतादिभेदेन चतुर्विधाताद्यस्वरतालचित्रादिद्विविधक्रमनिपुणानवदादिदणपुरस्सरं गायकवादिकादिसियातितमदर्शनम् .... | ” | ” |
| २० | नाट्यनृत्तनृत्यलास्यमण्डपदिग्दर्शनपूर्वकं देवदानवनृपतरुद्रुतमृगजीविषु विविधगतिगोदिलाक्षणतद्गुरुपञ्चाशल्लक्षणिकाभिनयकटिपार्दाद्याश्रितरेचकचारिमहागीतनामण्डलगाहारकरणावृत्तनृत्यादिवर्णनम् .... | ३१८ | १ |
| २१ | शय्यासनस्थानवर्णनम् .... | ३२५ | २ |
| २२ | स्वरस्तन्यदालक्तकान्तमभालसाह्यापञ्चाशत्स्थानकटाक्षदिदर्शनम् | ” | ” |
| २३ | वैष्णवसमपादादिभेदेन पुंस्थानकादिवर्णनम् .... | ३२६ | १ |
| २४ | अङ्गवर्णनम् .... | ” | ” |
| २५ | रसहास्यतम्प्रोगयुक्तकर्मतारकाकर्मनयनाचोकिनादिनर्त्तन दृष्टिकर्मतद्वृ- |
अनु०
| अध्यायाः | विषयाः | पत्राङ्काः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| ङ्गसूचकनासिकाकर्मजिह्वाधरोष्ठमर्द्दनदन्तकर्मगण्डपिण्डकर्मवर्णनम् | ३१९ | २ | |
| २६ | अर्धयुतसंतुतादिभेदेनपुरस्सरं तूर्ये करक्रियाम्, करकर्मलक्षणादि च | ३०१ | २ |
| २७ | वाचिकादिशौर्यकासिकोवकभेदेन चतुःप्रकाराभिनयमस्तकाङ्गिङ्गङ्गचनाङ्गुलीवदनादिबोधकप्रणवर्णनम् .... | ३२२ | २ |
| २८ | इन्द्रियार्थाभिनयप्रकाराः, दृष्टानिष्ठमध्यमभेदेन गात्रप्रवाङतादिना चेष्टानिष्ठ पणाम् प्रभातमागधगीतप्रबोधादिवर्तुवनस्वर्गजलशयादिङ्कनश्चयःअभिनयादिवर्णनम् .... | ३२८ | १ |
| २९ | जादूकर्दलक्षणंनाविकोक्तुङ्गमत्स्युडुमञ्चानांपर्वागौत्यूक्यादिषु नाबुकदीसमानादिनानागतिप्रचारवर्णनम् .... | ३३३ | २ |
| ३० | शृङ्गादिवन्नुवप्रक्रमकथनक्रमङ्गेन शृङ्गागढ्डास्यस्य रौद्रार्कणणस्य वीगतुङ्गम्य वैभन्माहृतनस्यश्रीयश्चिमिश्रिभाव नतहचनावर्णनभेदद्वयज्ञनादिदिग्दर्शनम् .... | ३२६ | १ |
| ३१ | हासनर्तकोक्तवेकापञ्चाशद्भावनिदिपणम् .... | ” | ” |
| ३२ | कर्णयुक्ताने विविधैर्वक्तव्यस्वभावौचित्यात्तत्तद्वस्तुभेदेनपुंभगवचूननिकोदिदन्तसमुदावर्णनम् .... | ३२७ | २ |
| ३३ | मन्त्र प्रज्ञानलक्षणप्रशंसा नवरोपंच्यदेवताविष्वादिदुतनुबलातुरवाचनान् | ३२८ | २ |
| ३४ | नवरंजनितचतुरङ्गमंत्रगद्यसर्वदुःखह्रणम् | ३३२ | २ |
॥१३॥