विष्णुधर्मोत्तर पुराण (तृतीय खण्ड - चित्रसूत्र, वास्तु, शिल्प व प्रतिमा लक्षण)

विष्णुधर्मोत्तर पुराण (तृतीय खण्ड - चित्रसूत्र, वास्तु, शिल्प व प्रतिमा लक्षण)
Vishnudharmottara Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (सम्पादक: डॉ. प्रियबाला शाह) द्वारा
स्रोत: Sri Vishnu Dharmottara Mahapuranam 1000p Classic Edition (उद्गम)
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वि० ध० ॥ १४ ॥ अनु० ॥ १४ ॥
| अध्यायाः | विषयाः | पत्राङ्काः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| ५१ | सहैके यमरूपनिरूपणं तस्य संकर्षणरूपता, तद्वाहनमहिषस्य मोह-रूपत्वं धूमोर्णारूपत्वं चित्रगुप्तस्वरूपकथनञ्चादि च .... | ३४० | १ |
| ५२ | सप्तशक्तिकायुधसवाहनवरुणस्वरूपं, तद्दक्षिणभागे मकरवाहनग-ङ्गास्वरूपम्, वामभागे सचामरकूर्मस्थयमुनास्वरूपम्, वरुणस्य प्रद्युम्नता तद्भार्याया रतिरूपतादिकथनञ्च .... | ” | २ |
| ५३ | धनदस्वरूपनिर्माणम्, तस्य वामभागे ऋद्धिः, शंखपद्मनिध्यादि तत्पार्श्वे, .... | ३४१ | १ |
| ५४ | गरुडरूपनिर्माणम् ... | ” | ” |
| ५५ | गौरीशप्रतिकृतिरचनम् ... | ” | २ |
| ५६ | स्वाहादिसहितोग्निप्रतिमार्निर्माणं चतुर्वेदषडङ्गयुक्ताग्निविचित्रसहितम् ... | ३४२ | १ |
| ५७ | विरूपाक्षरूपनिर्माणं सनिदृत्यादि .... | ” | ” |
| ५८ | आकाशवर्णस्य वायोः सप्तशक्तिकस्य निर्माणम् .... | ” | ” |
| ५९ | भैरवमहाकालयोः स्वरूपनिर्माणप्रकारः .... | ” | ” |
| ६० | एकवक्त्रद्विबाहुगदाचक्रधगविष्णुरूपमपरम् .... | ” | २ |
| ६१ | शुक्लं वर्णं चतुर्मुखं जगत्प्रसवाधिपं पञ्चहस्ततादिभूवर्णस्वरूपनिर्माणम् .... | ” | ” |
| ६२ | नीलोत्पलश्यामवर्णयुतमाकाशस्वरूपम् .... | ” | ” |
| ६३ | असिताभाग्निरूपयोगेश्वरः .... | ” | ” |
| ६४ | ध्यातुः सर्वार्थसाधकं सरस्वतरूपनिर्माणम् .... | ३४२ | २ |
| ६५ | अनन्त ( शेष ) रूपनिरूपणम् .... | ३४३ | १ |
| ६६ | जयविजयाख्यदत्त्वपराजितादेवीसहितस्य महादेवचम्बूरोंनिर्माणम् | ” | ” |
| ६७ | प्रकारद्वयेन पिंगलातिपिंगलगणयुक्तस्य रेवन्तादिचतुःपुत्रैश्च तत्प्रभिः पत्नीभिश्च सहितस्य रवे रूपनिर्माणम् .... | ” | ” |
| ६८ | सितचतुस्तुरङ्गरथस्थ कान्तितोषाभ्यां भार्याभ्यां सहितस्यानिवन्ध्याष्टा-विंशतिभार्याभिर्वा सहितस्य चन्द्रमसो निर्माणम् .... | ” | २ |
| ६९ | सायुधसवाहनभौमादिग्रहानेर्माणम् .... | ३४४ | १ |
| ७० | वर्तमानभविष्यन्मनुरूपनिर्माणम् .... | ” | ” |
| ७१ | स्कन्दविशाखमुखरुद्रकालोग्रिगणेशविश्वकर्मरूपनिर्माणम् .... | ” | ” |
| ७२ | धरादिसुतानां विष्ण्वब्जरूपादीनाञ्च रूपवर्णनम् .... | ” | ” |
| ७३ | कश्यपादिसप्तऋतुकाद्यादीनां ध्रुवागस्त्यभृगुप्रभृद्यनेकैदेवानां निर्माणम् .... | ” | ” |
| ७४ | लिङ्गरूपनिर्माणम् .... | ३४६ | १ |
| ७५ | व्योमरूपनिर्माणम् .... | ” | ” |
| ७६ | वदनेवृक्षमधु नगरानायपणरूपनिर्माणम् .... | ” | ” |
| ७७ | कीर्त्यादिचतुर्दशभार्यायुतधर्मरूपनिर्माणम् .... | ” | ” |
| ७८ | प्रकारत्रयेण नृसिंहमूर्तिनिर्माणम् .... | ” | ” |