विष्णुधर्मोत्तर पुराण (तृतीय खण्ड - चित्रसूत्र, वास्तु, शिल्प व प्रतिमा लक्षण)

विष्णुधर्मोत्तर पुराण (तृतीय खण्ड - चित्रसूत्र, वास्तु, शिल्प व प्रतिमा लक्षण)
Vishnudharmottara Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (सम्पादक: डॉ. प्रियबाला शाह) द्वारा
स्रोत: Sri Vishnu Dharmottara Mahapuranam 1000p Classic Edition (उद्गम)
DevanagariHindipublished1,001 पृष्ठ
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| वि० ध० | अनु० |
|---|---|
| ॥१५॥ | ॥१५॥ |
| अध्यायः | विषयाः | पत्राङ्काः | पृष्ठाङ्काः | अध्यायः | विषयाः | पत्राङ्काः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मासादिमासेषु सूर्यादिवारेषु प्रतिपदादितिथिषु शकुनादिकरणेषु मेषादित्येषु सूर्यादिहोरासु प्रतिष्ठाफलानि .... | ३६१ | १ | १०७ | श्रीवासुदेवविवोधनमन्त्राः .... | ३७१ | २ | |
| ९७ | प्रतिष्ठाविधिकथने यजमानस्त्वृत्विग्भिः सह दीक्षाग्रहणं स्वस्तिवाचनपूर्वकं प्रतिसरकंकणबन्धनमासनमर्यादित्यागहविष्यप्राशनादिनियमवर्णनम् .... | ३६१ | २ | १०८ | व्यक्ताव्यक्तमूर्तीष्णोध्यानंसौख्यार्थ भोगमोक्षहेतवे च मूर्तिकल्पनावाहनं .... | ” | ” |
| ९८ | विधिर्बलिंम तामासोऽधिवासनस्थण्डिलपश्चिमादिभागेषु कल्पकादिवेशपुरस्सरं कलशस्थापनांतरीगणन्यासध्वजबितानघटिप्रतीहारस्थापनघटादर्पणादिना सुसजीकरणं रक्षोध्नमंत्रैश्चेश्वररक्षकरणञ्च | ३६२ | १ | १०९ | होमविधिवर्णनम् .... | ३७२ | १ |
| ९९ | पञ्चगव्यसंस्कारः .... | ३६३ | १ | ११० | श्रीभगवद्विबोधनमन्त्रवर्णनम् .... | ” | २ |
| १०० | अर्चाशौचादिविवर्णनम् .... | ” | २ | १११ | बृहत्तनपद्मव्योमन्त्रमाहात्म्यवर्णनम् .... | ३७३ | १ |
| १०१ | अधिवासनवर्णनम् .... | ” | ” | ११२ | गन्धानुलेपनताम्बूलनिवेदनदूतिं(भांगदान)-वर्णनम् .... | ” | २ |
| १०२ | समन्त्रतोकै जीवाधोधाववासनाविधिर्वर्णनम् ... | ३६४ | १ | ११३ | मधुपर्कनिवेदनम् .... | ” | ” |
| १०३ | नास्त्यादिदेवतानामावाहनानि .... | ” | २ | ११४ | श्रीविष्णोर्वस्त्राणिनिवेदनपुरस्सरं भक्ष्यभोज्यादि-(हव्या)-निवेदनम् | ३७४ | १ |
| १०४ | ब्रह्मादिदेवतानामावाहनाद्यर्ध्याद धूपोदियमन्त्रकथनम् | ” | ” | ११५ | शङ्करगीताधिकविधिना सास्वेतेज्यावर्णनम् .... | ” | ” |
| १०५ | लोकपालशूलनन्दीश्वराद्यावाहनम् .... | ३६७ | ११६ | तोरणोद्धारादिविधिवर्णनम् .... | ” | ” | |
| १०६ | श्रीविष्णुव्येवकतावतारिदेवानां युधिष्ठिरादिपाण्डवानां याज्ञसेनीसीतादेवकीयशोदारुक्मिणीप्रभृतीनामावाहनादिवर्णनम् .... | ३६८ | २ | ११७ | तत्तद्देवतातिथिषु प्रथमादिपञ्चमादिवसपर्यन्तं विनायकग्रहर्र्कशेनागममथब्राह्मणपूजनानि षष्ठेऽह्नि च बृहत्स्नपनं कर्तव्यम्। तत्र सर्वेषां नागार्दिकाणां गक्षा सह महता वाद्यघोषेण नृत्यगीर्तिादिमङ्गलैस्तुतिभिक्षातृग्ममं निर्मित्तदर्शनञ्च .... | ” | २ |
| ११८ | धर्मार्थकाममोक्षादिकमानानुरागेणार्तिनरुद्धमंकर्पणप्रद्युम्नवासुदेवाद्यर्चनानि .... | ३७५ | १ |