विष्णुधर्मोत्तर पुराण (तृतीय खण्ड - चित्रसूत्र, वास्तु, शिल्प व प्रतिमा लक्षण)

विष्णुधर्मोत्तर पुराण (तृतीय खण्ड - चित्रसूत्र, वास्तु, शिल्प व प्रतिमा लक्षण)
Vishnudharmottara Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (सम्पादक: डॉ. प्रियबाला शाह) द्वारा
स्रोत: Sri Vishnu Dharmottara Mahapuranam 1000p Classic Edition (उद्गम)
DevanagariHindipublished1,001 पृष्ठ
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| अध्यायाः | विषयाः | पत्राङ्काः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| ११९ | समुद्रयात्रानुष्ठानविचारम्भादिकामानुसारं मत्स्यवराहहयग्रीवादिपूजनम् | ३७५ | २ |
| १२० | हयग्रीवादिदेवानां पूजाकालनिर्णयः | " | " |
| १२१ | पुष्करप्रयागकालञ्जरादितीर्थेषु ब्रह्मयोगिशयिमहादेवशतकलादिव्रतपूजनानियमः | ३७६ | १ |
| १२२ | विष्णोर्वासुदेवादीनामेषु मोक्षादिद्वादशशक्तितर्पणम् | " | " |
| १२३ | पूर्वादिदिक्सरलेन क्षमादिकामपरत्वेन च विष्णोश्चक्रादीनामस्मरणकीर्तनादिनाभीष्टसिद्धिः | " | " |
| १२४ | चैत्रादिमासपरत्वेन कृत्तिकादिनक्षत्रपरत्वेन च विष्ण्वादीनामस्मरणफलानि | ३७७ | १ |
| १२५ | अर्जुनावर्तेन पुष्करादिक्षेत्रेषु पुण्डरीकाक्षादिपञ्चपञ्चाशन्नामकीर्तनादिना पापक्षयपुरस्सरं महत्फलम् | " | " |
| १२६ | अष्टपत्रकमलकर्णिकायां ब्रह्मपूजनं पूर्वादिपत्रेषु च ऋगादिपूजनविधानम् | ३७८ | १ |
| १२७ | चैत्रशुक्लप्रतिपदादौ ब्रह्मादित्रिदेवपूजनविधानम् | " | " |
| १२८ | चैत्रशुक्लप्रतिपदि स्थले जले वा विष्णुपूजनेन सर्वपापक्षयमोक्षप्राप्तिः | " | २ |
| १२९ | अशीतिभागात्मकप्रकृतिमण्डलनिर्माणवार्तासुष्ठुत्वं, चैत्रशुक्लप्रतिपदि वेधोलक्ष्म्याश्च पूजनादिनियमाः | ३७९ | २ |
| १३० | नामत्रयपूजाचक्रव्रतप्रतिपादनम् | ३७८ | २ |
| १३१ | चैत्रशुक्लद्वितीयायां बालेन्दुव्रतवर्णनम् | ३७९ | १ |
| १३२ | अङ्गन्यासनिहतिप्रान्तम् | " | " |
| १३३ | ज्येष्ठशुक्लतृतीयायां त्रिविक्रमव्रतम् | " | " |
| १३४ | अस्यामेव तिथौ द्वितीयं त्रिविक्रमव्रतम् | " | " |
| १३५ | अस्यामेव तिथौ तृतीयं त्रिविक्रमव्रतम् | ३८० | २ |
| १३६ | वार्षिकश्चन्द्रेन्द्रस्य विष्णोरुक्त- ज्येष्ठशुक्लतृतीयायां तिथौ व्रताचरणपूर्वकमुक्तेनारत्नलोके यथेष्टसुखप्राप्तिः | " | " |
| १३७ | वह्निसूर्यसोमवरुणारुणविष्ण्वेषु श्रुतरश्मिव्रतवर्णनम् | " | " |
| १३८ | इन्द्रयमवरुणकुबेरचतुःसीतावतवर्णनम् | ३८१ | १ |
| १३९ | विष्णुभूमिमनोबलचतुर्भूतव्रतप्रतिधानम् | " | " |
| १४० | बलज्ञानैश्वर्यशक्तिरुचिमूर्तित्रितयवर्णनम् | " | " |
| १४१ | पञ्चमचतुर्भूतकल्पे वेदव्रतकथनम् | " | २ |
| १४२ | चैत्रशुक्लचतुर्थ्या वासुदेवस्य वैशाखे सङ्कर्षणस्य ज्येष्ठे प्रद्युम्नस्याप- | " | २ |