विष्णुधर्मोत्तर पुराण (तृतीय खण्ड - चित्रसूत्र, वास्तु, शिल्प व प्रतिमा लक्षण)

विष्णुधर्मोत्तर पुराण (तृतीय खण्ड - चित्रसूत्र, वास्तु, शिल्प व प्रतिमा लक्षण)
Vishnudharmottara Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (सम्पादक: डॉ. प्रियबाला शाह) द्वारा
स्रोत: Sri Vishnu Dharmottara Mahapuranam 1000p Classic Edition (उद्गम)
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वि० ध० | ॥ १६ ॥ | अनु०
[भाग १]
| अध्यायाः | विषयाः | पत्राङ्काः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| — | ठेऽनिरुद्धस्य चार्चनं विधाय योग्यब्राह्मणाय तत्तद्व्रतोक्तदक्षिणादिदानम् .... | ३८१ | २ |
| १४३ | सप्तमचतुर्मूर्त्तिकल्पेनेोद्विव्रतवर्णनम् .... | ३८२ | १ |
| १४४ | अष्टमचतुर्मूर्त्तिकल्पे चतुर्युगसूतवर्णनम् .... | ” | ” |
| १४५ | श्रावणादिचतुर्मासेषु विष्णुरूपिचतुःसागरोपचरणंकुम्भपूजनहवनादिविधानम् .... | ” | ” |
| १४६ | वासुदेवादिचतुर्मूर्त्तिण्डमकरादिरुचिसहितस्य पूजनम् .... | ” | २ |
| १४७ | ईशानाद्यैविश्वरूपश्चाक्षुषरूपाणि निर्माय चैत्रशुक्लादिप्रतिपदि भौमनादेयताम्रकाजलस्नानादिपद्मदित्यल्यवबूद्यहोमादिकमारेण व्रतवर्णनम् .... | ३८३ | १ |
| १४८ | शंखचक्रगदापद्मानां वासुदेवानिरुद्धादिचतुर्द्दण्डालमकानां श्रावणादिचतुर्मासेषु वह्निस्नानभक्तभोजनादिनियमपुरस्सरमर्चनम् .... | ” | ” |
| १४९ | वासन्तिकविषुवद्दिने त्रिरात्रोपवासपुरस्सरं यथाशक्ति वासुदेवाचंनं विधाय पुरो मासतूयं च नित्यार्चनफलाहारविधिं कृत्वा वामरोक्तविषुवद्दिने व्रतं समापयेत् .... | ” | ” |
| १५० | पूर्वोक्त ( १४९ अध्यायोक्त ) व्रते विष्णोः स्यागेऽनंतपूजनं विधाय द्वितीयादिषु महीगंगनेवद्यप्रामेकत्रवर्णनं व्रतमाचरेच्चंडनरूपपुष्पादिव्याभाः .... | ” | ” |
[भाग २]
| अध्यायाः | विषयाः | पत्राङ्काः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| १५१ | नरनारायणहंसादिरूपचतुर्मूर्त्तिव्रतवर्णनम्, समाप्तं चतुर्मूर्त्तितत्त्वम् ॥<br>अथ पंचमूर्त्तितत्त्वम् | ३८३ | २ |
| १५२ | चैत्रशुक्लपंचम्यां पृथिव्यादिपंचभूतात्मकस्य विष्णोः शुक्लादिवर्णमण्डलेषु तत्तद्वर्णगन्धपुष्पादिभिरर्चनम् .... | ” | ” |
| १५३ | बन्धूकोदधिषुपवित्रस्तरपरिवेस्तरनदीनां सफललतावाविधिवर्णनम् | ” | ” |
| १५४ | सावित्रीलक्ष्मीव्रतवर्णनम् .... | ” | ” |
| १५५ | पंचमूर्त्तिव्रते शंखचक्रगदापद्मपूजनहवनादि .... | ३८४ | १ |
| १५६ | वसतऋतुषु मधुमाधवादियुग्मनामकपण्मूर्त्तितत्त्ववर्णनम् .... | ” | २ |
| १५७ | सप्तमूर्त्तिव्रते सुभास्त्रादिदीप्तव्रतवर्णनम् .... | ” | ” |
| १५८ | चैत्रमासादारभ्य कृष्णपक्षे प्रतिदिनं रुक्मभौमादित्यालत्र नवव्रतन्म् | ३८५ | १ |
| १५९ | चैत्रशुक्लपक्षादारभ्य प्रत्यहं सप्ताहपर्यन्तं जम्बूद्वीपादिममद्वीपवर्णनम् | ” | ” |
| १६० | चैत्रशुक्लपक्षादारभ्य लवणादिसप्तसमुद्रतवर्णनम् .... | ” | ” |
| १६१ | महेंद्रादिसप्तकुलपर्वतपूजनविधिवानम् .... | ” | ” |
| १६२ | मन्वन्त्यादिसप्तमलोकव्रतवर्णनम् .... | ” | ” |
| १६३ | ह्रादिन्यादिनदीव्रतवर्णनम् .... | ” | ” |
| १६४ | नागसप्तव्रतवर्णनम् .... | ” | ” |
| १६५ | मोक्षप्राप्तिफलदं गताश्वव्रतकथनम् .... | ” | ३८६ |