विष्णुधर्मोत्तर पुराण (तृतीय खण्ड - चित्रसूत्र, वास्तु, शिल्प व प्रतिमा लक्षण)

विष्णुधर्मोत्तर पुराण (तृतीय खण्ड - चित्रसूत्र, वास्तु, शिल्प व प्रतिमा लक्षण)
Vishnudharmottara Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (सम्पादक: डॉ. प्रियबाला शाह) द्वारा
स्रोत: Sri Vishnu Dharmottara Mahapuranam 1000p Classic Edition (उद्गम)
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वि० ध० | अनु०
॥ १७ ॥
| अध्यायाः | विषयाः | पत्राङ्काः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| १९७ | ब्रह्मकूर्च-(पञ्चगव्य) वर्णनम् .... .... .... | ३९० | २ |
| १९८ | पौर्णमामावास्यासु द्वादशवर्षपर्यन्तं महाव्रतम् .... | ,, | ,, |
| १९९ | तिर्यग्योनिसंरूढदशजन्मनि निवारकं मेषादिसंक्रान्तिषु पशुरामकृष्णादिव्रतम् .... .... .... .... | ,, | ,, |
| २०० | इष्टप्राप्त्यादिव्रतवर्णनम् .... .... .... | ,, | २ |
| २०१ | सत्कुलादिमित्रव्रतवर्णनम् .... .... .... | ,, | ,, |
| २०२ | रूपावाप्तिव्रतवर्णनम् .... .... .... | ,, | ,, |
| २०३ | इह लावण्यमदभन्ते च स्वर्गाप्तिकरं व्रतम् .... .... | ३९२ | १ |
| २०४ | सौभाग्यविधायकव्रतम् .... .... .... | ,, | ,, |
| २०५ | आश्वयुजप्रतिपद्मारभ्यास्यपर्यन्तमारोग्यसम्पदादिषड्विधव्रतविधानम् | ,, | ,, |
| २०६ | ज्ञानबुद्धिविवर्द्धनं वैशाखमासवतम् .... .... | ,, | ,, |
| २०७ | विद्याप्राप्तिव्रतवर्णनम् .... .... .... | ,, | २ |
| २०८ | शीलप्राप्तिव्रतवर्णनम् .... .... .... | ,, | ,, |
| २०९ | धर्मप्राप्तिकरं श्रावणमासवतम् .... .... | ,, | ,, |
| २१० | धनप्राप्तिकरं सङ्कर्षणव्रतम् .... .... | ,, | ,, |
| २११ | लक्ष्मीप्राप्तिकरं ज्येष्ठमासवतम् .... .... | ,, | ,, |
| २१२ | भोगावाप्तिकमाघाद्यष्टमासवतम् .... .... | ३९३ | १ |
| अध्यायाः | विषयाः | पत्राङ्काः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| २१३ | जयप्राप्तिविधायकं कार्तिकमासवतम् .... .... | ३९३ | २ |
| २१४ | कार्तिकपौर्णमासीतः श्रावणीपर्यन्तं प्रतिपद्दिनेषुजननव्रतविधानम् .... | ,, | ,, |
| २१५ | फाल्गुन्याद्याश्चतस्रऋक्षैरेकादशीषु विविक्तकृष्णेकशयनादिव्रतकथनादिह लोके श्रेष्ठाप्तिमृतिकालसमये च श्रीकृष्णस्मरणमाप्नोति जनः .... | ||
| २१६ | फाल्गुनपूर्णिमायां लक्ष्मीनारायणाविन्दुगोरात्रिरूपिणावभ्यर्च्य चैत्रवैशा-खज्येष्ठमासेषु चैतेयथासंख्यं पारणमा आपाढाश्रावणाभाद्रपदाश्विन-मासेषु श्रिया सह श्रीधरं सम्पूज्य चन्द्रमसः पूजनेन द्वितीयं पारणम् । कार्तिकादिमासेषु केशवमर्चयित्वा मुक्तिचन्द्रमसः पूजनेन तृतीयं तुरीये पारणम् । एतत्पारणत्रये प्रथमपारण पञ्चगव्यप्राशनं, द्वितीये कुशौदकं, तृतीये सुवर्णोदकप्राशनेति नियमनं लक्ष्मीनारायणौ सम्पूज्य नरो नैविद्ययुक्तैऽन्नफलैर् लभते च द्रुमस्मृतिं मुक्तिञ्च तत इति .... | ३९४ | १ |
| २१७ | चैत्रकृष्णाष्टम्यामुपवासपुरस्सरं कृष्णाष्टमीमर्च्य वशागव्यदुग्ध-योनिन्नमिश्रकपारणव्रतस्नानादिविधानेन सम्मस्तानायुरन्नदा स्यात् । | ,, | २ |
| २१८ | हरिशयनप्रबोधनयोर्मध्ये द्वादशव्रतविधानाव्रतनिर्देशनम् | ,, | ,, |
| २१९ | भाद्रशुक्लद्वादश्यां प्रारभ्य यावत्संवत्सरं द्वादशीव्रतव्रतवर्णनम् | ३९७ | ,, |
| २२० | पापशुद्धशर्वाणी दम्परत्नं प्रनहद्भावनेषु जगदर्चितनदानगोदत्र-प्राप्तानादिविधानम् .... .... .... | ,, | ,, |
॥ १७ ॥