विष्णुधर्मोत्तर पुराण (तृतीय खण्ड - चित्रसूत्र, वास्तु, शिल्प व प्रतिमा लक्षण)

विष्णुधर्मोत्तर पुराण (तृतीय खण्ड - चित्रसूत्र, वास्तु, शिल्प व प्रतिमा लक्षण)
Vishnudharmottara Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (सम्पादक: डॉ. प्रियबाला शाह) द्वारा
स्रोत: Sri Vishnu Dharmottara Mahapuranam 1000p Classic Edition (उद्गम)
DevanagariHindipublished1,001 पृष्ठ
पृष्ठ 43, कुल 1001 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 43
| अध्यायाः | विषयाः | पत्राङ्काः | पृष्ठाङ्काः | अध्यायाः | विषयाः | पत्राङ्काः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| २२१ | चैत्रशुक्लप्रतिपदादौ ब्रह्मादिदेवानां सहेतुफलं पूजनम् | ३९६ | २ | र्जन्मादिनियमपुरस्सरमाचारगतिकथनम् | ४०१ | १ | |
| २२२ | रोचेषु मासोपवासफलानिरूपणम् | ३९७ | " | २३४ | महापातकोपपातकादिनिर्देशपूर्वकं प्रायश्चित्तवर्णनम् | ४०३ | २ |
| २२३ | तत्तन्नक्षत्रेषु तत्तद्देवादिपूजनवर्णनम् | ३९८ | " | २३५ | रहस्यप्रायश्चित्तनिर्देशः | ४१० | " |
| २२४ | अष्टावक्रादिक्संवादे तया स्त्रीस्वभावादिवर्णनं भार्गवेण मुनिनिष्ठावक्त्राय स्वसुताया दिशो दानञ्च | ३९९ | १ | २३६ | पापप्रशमनाश्राद्धजपादिच्छिद्रच्छद्मवर्णनम् | " | " |
| २२५ | पुरुषसूक्तविधानेन संवत्सरपर्यन्तं हंसस्वरूपजनार्दनपूजनव्रतम् | ४०० | " | २३७ | दानतपोवृद्धगवादिकर्मदानं भोगिनस्त्वग्ज्यामालादिकल्पकथनम् | ४११ | |
| २२६ | ऋतुतुगस्यान्ते दाम्पत्यव्यवहारप्रवृत्तैर्लोभदंभादिदोषमाकुले लोके हंस-रूपिनारायणेन मुन्यनुरोधेन ज्ञानोपदेशकथनमभिहितमासीत् | " | " | २३८ | निधनसूचकाङ्गारिष्टयोगवर्णनम् | ४१२ | |
| अथ हंसगीता। | २३९ | अज्ञानेनापाज्ञानफलानि | ४१३ | ||||
| २२७ | वर्णाश्रमधर्मवर्णनम् | " | २ | २४० | पापफलदुःखवर्णनम् | " | २ |
| २२८ | ब्रह्मचर्यपालनपुरःसरं वेदस्वीकरणादन्यमावण्याद्गुरुकुले वासो गृहाश्रमस्वीकृतिर्वा | " | " | २४१ | कामासक्तिनिन्दाथार्थ्यपूर्वकं कामसेवनेन सुखम् | " | " |
| २२९ | गृहस्थधर्मवर्णनम् | ४०१ | १ | २४२ | चञ्चलं लक्ष्मीरस्वभावं निश्चित्य तन्नाशे न हृष्येत् | ४१४ | " |
| २३० | भिक्षाभक्ष्यवर्णनम् | " | " | २४३ | मानदोषवर्णनम् | " | " |
| २३१ | द्रव्यशुद्धिनिरूपणप्रसङ्गे मलमूत्रादीनां परिगणनम् | " | २ | २४४ | मददोषवर्णनम् | " | " |
| २३२ | अशौचविधिवर्णनम् | " | " | २४५ | लोभदोषवर्णनम् | " | " |
| २३३ | हस्ते देवादितर्पणानि जपादिकोले मनःप्रणिधानमक्रोधकार्याद्यावन्त- | २४६ | क्रोधदोषवर्णनम् | " | " | ||
| २४७ | नास्तिक्यस्य गुरुतरपापवर्णनम् | " | " | ||||
| २४८ | अहङ्कारस्य सर्वनाशकत्वम् | ४१५ | |||||
| २४९ | शौचवर्णनम् | " | " |