भारतकोश
विवेकचूड़ामणि (हिन्दी अनुवाद सहित)

विवेकचूड़ामणि (हिन्दी अनुवाद सहित)

Viveka Chudamani with Hindi Translation - Gita Press

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished153 पृष्ठ

पृष्ठ 147, कुल 153 में से

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१५० विवेक-चूडामणि ग्रन्थ-प्रशंसा संसाराध्वनि तापभानुकिरणप्रोद्भूतदाहव्यथा- खिन्नानां जलकाङ्क्षया मरुभुवि श्रान्त्या परिभ्राम्यताम्। अत्यासन्नसुधाम्बुधिं सुखकरं ब्रह्माद्वयं दर्शय- न्त्येषा शंकरभारती विजयते निर्वाणसन्धायिनी ॥ ५८१ ॥ संसार-मार्गमें नाना प्रकारके क्लेशरूपी सूर्यकी किरणोंसे उत्पन्न हुए दाहकी व्यथासे पीड़ित होकर मरुस्थलमें जलकी इच्छासे भटकते हुए थके-माँदे पुरुषोंको अति निकटमें ही अद्वितीय ब्रह्मरूप अत्यन्त आनन्ददायक अमृतका समुद्र दिखानेवाली यह श्रीशंकराचार्यजीकी निर्वाणदायिनी वाणी निरन्तर जयको प्राप्त हो रही है। इति श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यगोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यश्रीमच्छंकर- भगवत्कृतो विवेकचूडामणिः समाप्तः

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