बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ११ ) अपने विचारों से तथा अपने हाथों से धनोपार्जन में सक्रिय हैं, उनका भी दाहिना हाथ ही देखना चाहिए । यहां यह प्रश्न उठता है कि जब जीवन में दाहिने हाथ का ही महत्त्व है तो बायें हाथ की क्या उपयोगिता है ? मैंने ऊपर ही यह बात स्पष्ट कर दी है कि जो व्यक्ति बायें हाथ से ही लिखते हैं या जिनका बायां हाथ ज्यादा सक्रिय है, उनके बायें हाथ को ही महत्व देना चाहिए । साथ ही साथ उन स्त्रियों का भी बायां हाथ ही देखना चाहिए जो पराश्रयी हैं या जो अपने पति पर अथवा अपने पिता पर आश्रित हैं । इसी प्रकार जो पुरुष बेकार हैं या स्वयं धनोपार्जन में सक्षम नहीं हैं उनका भी भविष्य स्पष्ट करते समय बायें हाथ को ही महत्व देना चाहिए । इसके साथ ही इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि जब हम किसी पुरुष के दाहिने हाथ को महत्व दें और उस हाथ में कोई बात स्पष्ट दिखाई न दे तो उसकी स्पष्टता के लिए दूसरे हाथ का अर्थात् बायें हाथ का आश्रय लेना चाहिए । इस प्रकार यदि कोई तथ्य या घटना दोनों ही हाथों से दिखाई दे तो उस घटना को प्रामाणिक मानना चाहिए । इसी प्रकार जो महिलाएं राजकीय सेवा में हैं अथवा स्वतंत्र व्यवसाय में संलग्न हैं उनका दाहिना हाथ देखना चाहिए, पर इसके साथ ही साथ यदि कोई बात पूर्णतः स्पष्ट नहीं होती है तो उसकी स्पष्टता बायें हाथ को देख- कर ज्ञात कर लेनी चाहिए । प्रश्न उठता है कि क्या हाथ की रेखाओं के माध्यम से सही और सफल भविष्य- फल स्पष्ट किया जा सकता है ? कई लोग इस मामले में सन्देह करते हैं । अधिकतर लोग इस तथ्य को मेरे सामने व्यक्त करते हैं कि जब हाथ की रेखाएं बराबर बदलती रहती हैं तो फिर उससे भविष्यफल कैसे ज्ञात किया जा सकता है ? कुछ लोगों ने यह भी प्रश्न किया कि विद्वानों के अनुसार सात वर्षों में पूरे हाथ की रेखाएं बिल्कुल बदल जाती हैं तब फिर अगले दस वर्षों का भविष्य या बीस वर्षों का भविष्यफल ज्ञात करना असम्भव सा ही है । परन्तु जैसा कि मैं पीछे स्पष्ट कर चुका हूं कि ये बातें उन लोगों ने फैलाई हैं जिन्हें हस्तरेखा का पूर्ण ज्ञान नहीं है या जिनका ज्ञान केवल किताबी ज्ञान है । वास्तविकता यह है कि हाथ की रेखाएं बदलती नहीं हैं । हाथ में जो मूल रेखाएं हैं वे ज्यों की त्यों विद्यमान रहती हैं । इनकी.सहायक रेखाएं कुछ समय के लिए बनती हैं और भावी तथ्यों का संकेत देती हुई मिट जाती हैं । इनके साथ ही साथ हाथ पर पाये जाने वाले कुछ ऐसे चिह्न अवश्य होते हैं जो कुछ समय के लिए बनते हैं और मिट जाते हैं । उन चिह्नों का बनना विशेष घटनाओं का प्रतीक है । इसी प्रकार उन चिह्नों का मिट जाना भी अपनेआप में आने वाले भविष्य का संकेत है । अतः ये चिह्न बनकर अथवा मिटकर आने वाले समय के तथ्यों का निरूपण ही करते हैं ।