बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १२५ ) ३. इसका उद्गम मंगल पर्वत से भी देखा गया है। यहां से प्रारम्भ होकर यह रेखा हृदय रेखा को काटती हुई सूर्य पर्वत पर पहुंचती है। ४. कुछ हथेलियों में यह रेखा मस्तिष्क रेखा से प्रारम्भ होकर सूर्य पर्वत को स्पर्श करती है। ५. इसका उद्गम हृदय रेखा से भी होता देखा गया है। यहां से यह सूर्य पर्वत तक जाती है। ६. कभी-कभी यह रेखा हर्षल क्षेत्र से प्रारम्भ होकर सूर्य पर्वत तक पहुंच जाती है। ७. कभी-कभी यह रेखा चन्द्र पर्वत से प्रारम्भ होकर सूर्य पर्वत की ओर जाती हुई दिखाई देती है। ८. कुछ हाथों में यह रेखा मणिबन्ध से प्रारम्भ होकर सूर्य पर्वत पर मार्ग की सभी रेखाओं को काटती हुई जा पहुंचती है। ९. हथेली में इस रेखा को केतु पर्वत से प्रारम्भ होकर भी अनामिका के मूल तक पहुंचते हुए देखा गया है। १०. कई बार इस रेखा का उद्गम राहू क्षेत्र से भी देखा गया है। ११. कुछ हथेलियों में यह रेखा हथेली के बीच में से प्रारम्भ होकर सूर्य पर्वत पर पहुंच जाती है। १२. कुछ हथेलियों में यह रेखा बुध पर्वत से प्रारम्भ होकर सूर्य पर्वत तक पहुंचने में सक्षम होती है। जहां तक मेरी जानकारी है, इस रेखा के उद्गम यहीं हैं। परन्तु इसके अलावा भी इस रेखा के उद्गम हो सकते हैं, परन्तु पाठकों को यह ध्यान में रखना चाहिए कि सूर्य रेखा वही मानी जा सकती है जिसकी समाप्ति सूर्य पर्वत पर होती है। अब मैं प्रत्येक उद्गम स्थल से प्रारम्भ होने वाली सूर्य रेखा का संक्षेप में वर्णन स्पष्ट कर रहा हूं : १. प्रथमा अवस्था : यह रेखा शुक्र पर्वत से प्रारम्भ होकर सूर्य पर्वत तक पहुंचती है। ऐसी रेखा अपने आप में अत्यन्त अनुकूल मानी जाती है। ऐसी रेखा रखने वाला व्यक्ति आर्थिक दृष्टि से सम्पन्न होता है। जीवन में पत्नी के अलावा अन्य कई स्त्रियों से सम्पर्क रहता है और उनसे धन-लाभ करता है अथवा ऐसे व्यक्ति को ससुराल से विशेष धन प्राप्त होता है। सही शब्दों में कहा जाय तो ऐसे व्यक्ति का भाग्योदय विवाह के उपरांत ही होता है और अधिकतर ऐसे लोगों के भाग्योदय प्रेमिका के माध्यम से होते देखे गये हैं। कई बार ऐसे व्यक्ति गोद चले जाते हैं जिससे उन्हें विशेष धन-प्राप्ति हो जाता है। २. द्वितीयावस्था : बहुत कम हाथों में ऐसी रेखा देखने को मिलती हैं परन्तु जिन लोगों के हाथों में ऐसी रेखा होती है वे व्यक्ति उच्च कोटि के कलाकार तथा