भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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भावुक होते हैं साथ ही कला के माध्यम से धन-संचय करते हैं। उनका भाग्य अपने आप में उज्ज्वल होता है। स्वभाव से ये व्यक्ति रसिक मिलनसार तथा सम्मोहक व्यक्तित्व वाले होते हैं। ३. तृतीयावस्था : इस प्रकार की सूर्य रेखा जिन हथेलियों में होती है वे व्यक्ति मिलिट्री में या पुलिस विभाग में उच्च पद पर पहुंचते हैं तथा अपने कार्यों से राज्यस्तरीय अथवा राष्ट्रस्तरीय सम्मान प्राप्त करते हैं। यद्यपि ऐसे व्यक्ति अपने ही प्रयत्नों से सफलता प्राप्त करते हैं, परन्तु धीरे-धीरे परिश्रम करते हुए अन्त में अपने लक्ष्य तक पहुंच जाते हैं। ४. चतुर्थावस्था : ऐसे व्यक्ति प्रमुखः बुद्धिजीवी होते हैं। इसके अन्तर्गत उच्च कोटि के वैज्ञानिक तथा तार्किक एवं दार्शनिक व्यक्ति होते हैं। ये जीवन में चाहे किसी भी प्रकार का कार्य प्रारम्भ करें इन्हें पूरी सफलता मिलती है और प्रत्येक क्षेत्र मे वे अपनी तीक्ष्ण बुद्धि का प्रयोग करते हैं। इनके कार्य अपने आप में महत्त्व- पूर्ण होते हैं। जीवन के २८ वें वर्ष से इनका भाग्योदय होता है तथा समाज में इनको विशेष सम्मान तथा यश प्राप्त होता है। ५. पंचमावस्था : जिन हथेलियो में इस प्रकार की रेखा होती है, वे अपने जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त करते हैं। यद्यपि यह बात सही है कि इनका प्रारम्भिक जीवन जरूरत से ज्यादा कष्टमय होता है परन्तु अपने प्रयत्नों से ये इतनी अधिक प्रगति कर लेते हैं कि लोग दांतो तले उंगली दबाते हैं। जीवन के १५ वर्षों के बाद इनका सम्मान और ख्याति अत्यन्त उच्च स्तर का हो जाता है। इनके कार्य चमत्कार- पूर्ण ढंग से सम्पन्न होते हैं तथा जीवन में और मृत्यु के बाद भी इन्हें अक्षुण्ण यश मिलता है। परन्तु यदि यह रेखा मार्ग में ही टूट जाती है तो उसे जीवन में बदनामी का भी सामना करना पड़ता है। ६. षष्ठावस्था : ऐसे व्यक्ति को जीवन में बहुत अधिक परिश्रम करना पड़ता है। न तो उसे जीवन में व्यवस्थित ढंग से शिक्षा मिलती है और न उसे जीवन में ऊंचा उठाने में कोई सहायता देता है। ऐसे व्यक्ति जीवन में जो भी उन्नति करते हैं अपने प्रयत्नों से ही कर पाते हैं। फिर भी आगे चलकर ये व्यक्ति न्यायाधीश बैरिस्टर अथवा प्रमुख शिक्षा-शास्त्री बन जाते हैं। जीवन में कई बार विदेश यात्राएं करते हैं तथा विदेश में प्रेम सम्बन्ध के कारण बदनामी भी सहन करनी पड़ती है। ७. सप्तावस्था : ऐसे व्यक्तियों का भाग्योदय विवाह के बाद ही होता है। विवाह के बाद ये व्यक्ति आश्चर्यजनक रूप से प्रगति करते हैं। अपने कार्यों में सफ- लता प्राप्त करते हैं, तथा अपने लक्ष्य तक पहुंचने की योग्यता जुटा पाते हैं। ऐसे व्यक्ति भावुक सहृदय एवं रसिक होते हैं। शान-शौकत, दिखावा आदि इनको प्रिय लगता है। आडम्बर-प्रिय ये व्यक्ति अपने चारों ओर भ्रम का वातावरण बनाये रखते हैं।