बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १२६ ) २०. यदि सूर्य रेखा हाथ में नहीं हो तो उस व्यक्ति का जीवन लगभग बेकार रहता है । २१. यदि सूर्य रेखा पर वर्ग का चिह्न हो तो उसे जीवन में कई बार अपमान सहन करना पडता है । २२. यदि दोनों ही हाथों में यह रेखा जीवन रेखा से प्रारम्भ होती हो तो वह कला के माध्यम से सफलता प्राप्त करता है । २३. यदि सूर्य रेखा का अन्त दो धाराओं से होता हो या अन्त में यह रेखाएं दो भागों में बंट जाती हो तो समाज में उसे सम्मान नहीं मिलता । २४. यदि सूर्य रेखा के साथ-साथ कई ओर सहायक रेखाएं दिखाई दें तो वह जीवन में आश्चर्यजनक प्रगति प्राप्त करता है । २५. यदि विवाह रेखा के द्वारा सूर्य रेखा कटी हुई हो तो उसका गृहस्थ- जीवन पूर्णतः दुखदायी होता है । २६. यदि सूर्य रेखा से कोई एक रेखा मस्तिष्क रेखा की ओर जाती हो तो उसे जीवन में पूर्ण धन-लाभ रहता है । २७. यदि इस रेखा पर चतुर्भुज का चिह्न हो तो उसे प्रारम्भ में बहुत ज्यादा असफलताएं मिलती हैं परन्तु अन्त में पूर्ण सफलता मिल जाती है । २८. यदि इस रेखा को तीन-चार रेखाएं काटती हों तो वह जीवन में किसी भी कार्य में सफल नहीं होता । २६. यदि शनि पर्वत से कोई रेखा निकलकर सूर्य रेखा को काटती हो तो आर्थिक कमी की वजह से वह जीवन में सफल नहीं हो पाता । ३०. यदि यह रेखा स्पष्ट हो पर साथ में कुछ लहरदार रेखाएं दिखाई दें तो उस व्यक्ति की प्रतिभा का कोई उपयोग नहीं होता । ३१. यदि सूर्य रेखा गहरी हो और इसके दोनों ओर जो सहायक रेखाएं चल रही हो तो उस व्यक्ति को उच्चस्तरीय सम्मान मिलता है । ३२. यदि सूर्य रेखा से कोई शाखा निकलकर शनि पर्वत की ओर जाती है तो उस पर्वत के विशेष गुण व्यक्ति को प्राप्त होते हैं । ३३. यदि सूर्य रेखा से कोई शाखा निकलकर गुरु पर्वत पर पहुंचे तो उस व्यक्ति को जीवन में श्रेष्ठ राज्य पद प्राप्त होते है । ३४. यदि इस रेखा के आस-पास बहुत सी छोटी-छोटी रेखाएं दिखाई दें तो उसके जीवन में आर्थिक बाधा रहती है । ३५. यदि हृदय रेखा से निकलकर कोई शाखा त्रिशूल वत बन कर सूर्य रेखा को स्पर्श करे, तो ऐसा व्यक्ति अपने जीवन में स्वयं के प्रयत्नों से ही सफलता प्राप्त करता है ।