भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( १३३ ) ५. यह रेखा जीवन रेखा को काटती हुई शनि पर्वत तक पहुंचने का प्रयास भी करती है। ६. कुछ हाथों में मैंने भाग्य रेखा राहू क्षेत्र से भी निकलती हुई देखी है। ७. भाग्य रेखा हृदय रेखा से निकलकर शनि पर्वत को स्पर्श करती हुई अनुभव की है। ८. कई बार यह रेखा नेपच्यून क्षेत्र तक शनि पर्वत तक जाती है। ६. कुछ हाथों में यह रेखा चन्द्र पर्वत से भी निकलती है। १०. हर्षल क्षेत्र से भी इस रेखा का प्रारम्भ देखा जा सकता है। ११. कई बार यह रेखा मस्तिष्क रेखा से प्रारम्भ होकर शनि पर्वत की ओर जाती है। ऊपर मैंने भाग्य रेखा के ग्यारह उद्गम स्थान बताये हैं। अधिकतर हाथों में उद्गम स्थल इसी प्रकार के दिखाई देते हैं। परन्तु इसके अलावा भी उद्गम स्थल हो सकते हैं। आगे के पृष्ठों में मैं इन उद्गम स्थलों से संबंधित भविष्यफल स्पष्ट कर रहा हूं : १. प्रथमा अवस्था :— इस प्रकार की भाग्य रेखा सर्वात्मक कहलाती है। यह रेखा जितनी अधिक स्पष्ट गहरी और निर्दोष होगी उतनी ही अच्छी कही जायेगी और उतना ही श्रेष्ठ मिल सकेगा। इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि भाग्य रेखा शनि पर्वत तक पहुंचती है तो वह शुभ कहलाती है। परन्तु यदि शनि पर्वत को पार कर मध्यमा उंगली पर चढ़ने लग जाती है तो वह विपरीत फल देने लग जाती है कुछ हाथों में मैंने यह भाग्य रेखा मध्यमा रेखा के दूसरे पौर तक पहुंचते हुए देखा है परन्तु इस प्रकार की रेखा बनने का यह तात्पर्य यह है कि ऐसे व्यक्ति में महत्त्वा- कांक्षाएं तथा इच्छाएं जरूरत से ज्यादा होंगी परन्तु वह अपने जीवन में अपनी इच्छाओं को पूरी होते हुए नहीं देख पाता। यह बढ़ी हुई भाग्य रेखा व्यक्ति बने बनाये कार्य को बिगाड़ देती है। परन्तु इस प्रकार की यह रेखा मध्यमा उंगली पर न चढ़े अपितु शनि क्षेत्र तक ही जाकर रुक जाय तो ऐसी रेखा शुभ फलदायक कही जाती है। यदि भाग्य रेखा शनि क्षेत्र तक जाते-जाते दुमुंही हो जाती है तो यह विशेष सफलता का सूचक है। यदि भाग्य रेखा के अन्तिम बिन्दु पर दो सिराएं फटकर एक सिरा शनि पर्वत पर रुकता है और दूसरा सिरा गुरु पर्वत तक पहुंच जाय तो वह व्यक्ति अपने जीवन में बहुत अधिक ऊंचे पद पर पहुंचता है। ऐसे व्यक्ति सामान्य घराने में जन्म लेकर भी उच्चपद प्राप्त होते देखा गया है।