भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( १३४ ) यदि भाग्य रेखा को शनि पर्वत पर तिरछी रेखाएं काटती हों तो उसे अपने जीवन में बाधाएं देखने को मिलती हैं । बहुत अधिक बाधाओं के बाद भी वह अपने जीवन में सफल हो पाता है । ये बाधक रेखाएं जितनी ही कम होती हैं उतनी ही ज्यादा अच्छी मानी जाती हैं । यदि भाग्य रेखा का उद्गम मणिबन्ध के नीचे से हो तो ऐसी रेखा भी दोष- पूर्ण मानी जाती है । ऐसे व्यक्ति दरिद्र तथा भाग्यहीन जीवन व्यतीत करते हैं । २. द्वितीयावस्था :—सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार इस प्रकार की रेखा भी श्रेष्ठ मानी गई हैं । परन्तु यदि इस प्रकार की रेखा मध्यम उंगली पर चढ़ने का प्रयत्न करे तो यह बाधाओं को पैदा करने वाली मानी गई है । ऐसे व्यक्ति साहसी होते हुए भी परेशानियों से घिरे रहते हैं । ऐसे व्यक्तियों को जीवन में सफलता बहुत मुश्किल से मिलती है । जिसके हाथ में इस प्रकार की रेखा शनि पर्वत पर पहुंच जाती है तो यद्यपि वह व्यक्ति बचपन में परेशानियां उठाता है परन्तु आगे चलकर वह अपने प्रयत्नों से उन्नति करता है । और २८वें वर्ष में उसका पूर्ण भाग्योदय होता है । ऐसे व्यक्ति संकोची स्वभाव के होते हैं तथा तुरन्त निर्णय लेने में समर्थ नहीं हो पाते । यदि इस प्रकार की भाग्य रेखा पर आड़ी-तिरछी रेखाएं हों तो उस व्यक्ति के जीवन में कई बार बाधाएं आती हैं । और अत्यन्त परिश्रम के बाद भी वह जीवन में सफल हो पाता है । यदि भाग्य रेखा के साथ-साथ जीवन रेखा भी बढ़ रही हो तो ऐसी रेखा शुभ नहीं मानी जाती । जीवन रेखा और भाग्य रेखा का परस्पर मिलना या आपस में लिपटना ही अनुकूल नहीं कहा जाता । ३. तृतीयावस्था :—यह रेखा जितनी स्पष्ट होती है उतना ही ज्यादा शुभ माना जाता है । ऐसी भाग्य रेखा जीवन रेखा को काट कर ही आगे बढ़ती है परन्तु जिस जगह वह जीवन रेखा को काटती है । जीवन की उस अवधि में उसे बहुत अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है । ऐसी स्थिति होने पर वह व्यक्ति भयंकर दुर्घटना में घायल हो सकता है । दिवालिया हो सकता है, अथवा आत्महत्या कर सकता है । यह रेखा शुक्र पर्वत से निकलती है अतः यह बात सही समझनी चाहिए कि उस व्यक्ति का भाग्योदय विवाह के बाद ही होता है । ऐसा व्यक्ति प्रेम के क्षेत्र में बहुत अधिक बढ़ा-चढ़ा होता है । तथा ससुराल से बहुत अधिक धन मिलता है । ऐसे व्यक्ति की स्त्री सुन्दर, आकर्षक तथा तड़क-भड़क से रहने वाली होती है । परन्तु ऐसे व्यक्तियों का बुढ़ापा बहुत कष्ट का होता है । उनका वैवाहिक जीवन भी सुखमय नहीं माना जाता । इस प्रकार की भाग्य रेखा के बीच में यदि द्वीप का चिह्न दिखाई दे तो पति पत्नी मतभेद की वजह से एक साथ नहीं रह पाते ।