बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ११६ ) व्यक्ति अपने जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त करता है । ७. सप्तमावस्था :—हृदय रेखा से निकलने वाली यह भाग्य रेखा सीधी शनि पर्वत तक पहुंच जाती है पर कुछ लोगों के हाथों में यह रेखा आगे चलकर त्रिशूल की तरह बन जाती है जिसका एक सिरा सूर्य पर्वत की ओर दूसरा हिस्सा गुरु पर्वत की ओर जाता है । ऐसी भाग्य रेखा अत्यन्त शुभ मानी गई हैं । यदि इस प्रकार की भाग्य रेखा अन्त मे जाकर दो टुकड़ों में बंट जाय तो वह व्यक्ति अपने जीवन में अपूर्व धन मान, यश, पद, प्रतिष्ठा प्राप्त करता है । ऐसा व्यक्ति सहृदय होता है अपने जीवन में वह निरन्तर दूसरों की सहायता करता रहता है । वह अपने प्रयत्नों से लाखो करोड़ों रुपये कमाता है और धार्मिक कार्यों में खर्च भी करता है । यदि इस रेखा के प्रारम्भ में द्वीप का चिह्न हो तो उसे अपने जीवन में बहुत बड़ी बदनामी उठानी पड़ती, है यदि यह रेखा बीच में टूटी हुई हो तो आयु के उस भाग में उसे विशेष आर्थिक हानी सहन करनी पड़ती है, यदि इस रेखा पर आड़ी-तिरछी रेखाएं हों तो उस व्यक्ति को जीवन में कई बार संघर्षों का सामना करना पड़ता है और अत्यन्त कठिनाई के बाद ही वह सफलता प्राप्त कर पाता है । यदि इस रेखा के अन्तिम स्थान पर तारे का चिह्न हो तो उसकी अकाल मृत्यु होती है । यदि यह रेखा मध्यमा उंगुली पर चढ़ने का प्रयत्न करें तो वह जीवन में बराबर असफलता का सामना करता है । ८. अष्टमावस्था : यदि यह रेखा निर्दोष स्पष्ट और गहरी हो तो उस व्यक्ति का बचपन अत्यन्त सुखमय व्यतीत होता है । विद्या की दृष्टि से वह श्रेष्ठ विद्या प्राप्त करता है । इस प्रकार के बालक की बुद्धि तेज होती है और वे अपने स्वतंत्र विचारों के कारण पहिचाने जाते हैं । यद्यपि परिवार से इनको किसी प्रकार का कोई विशेष सहयोग नहीं मिलता । फिर भी ये प्रयत्न करके सफलता की ओर बढ़ जाते हैं। ऐसे व्यक्ति सफल साहित्यकार न्यायाधीश अथवा दार्शनिक होते हैं। ऐसे व्यक्तियों का गृहस्थ जीवन पूर्णतः सुखमय कहा जा सकता है । विदेश यात्रा का योग इनके जीवन में कई बार होता है परन्तु इस प्रकार की भाग्य रेखा टूटी हुई या लहरदार हो तो उस व्यक्ति के जीवन में सफलता के अवसर कम रहते हैं । उसे जीवन में बार बार संघर्ष करना पड़ता है बहुत अधिक प्रयत्न के बाद ही सफलता मिल पाती है । यदि इस प्रकार की भाग्य रेखा अन्त में जाकर दो मुही बन जाती है तो यह श्रेष्ठ संकेत है, और ऐसा व्यक्ति निश्चय ही अपने उद्देश्यों में सफल होता है । ६. नवमावस्था : इस प्रकार की भाग्य रेखा को अत्यन्त शुभ माना गया है । यदि यह रेखा शनि पर्वत पर जाकर दो भागों में या तीन भागो में बंट जाती है तो वह व्यक्ति अतुलनीय धन का स्वामी होता है तथा जीवन में पूर्ण प्रगति करता है ।