बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १३७ ) ऐसे व्यक्ति के जीवन में आय के स्रोत एक से अधिक होते हैं। यदि इस प्रकार की भाग्य रेखा का अन्तिम सिरा गुरु पर्वत की ओर जा रहा हो तो वह व्यक्ति साहित्य के माध्यम से श्रेष्ठ फल प्राप्त करता है। यदि इस प्रकार का सिरा सूर्य पर्वत की ओर जाता हो तो वह विदेश में व्यापार कर पूर्ण सफलता प्राप्त करता है। धार्मिक कार्यों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेता है तथा समाज में उसे सम्माननीय स्थान मिलता है। यदि इस प्रकार की रेखा टूटी हुई या जंजीरदार हो तो उसे जीवन में बहुत अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यदि यह रेखा मध्यमा उंगली की पोर पर चढ़ रही हो तो उसे जीवन में जरूरत से ज्यादा हानि सहन करनी पड़ती है। जिस व्यक्ति के हाथ में ऐसी भाग्य रेखा होती है उनका भाग्योदय विवाह के बाद ही होता है। उनका मन अस्थिर तथा वृत्ति चंचल होती है। जीवन में एक से अधिक स्त्रियों से वह सम्पर्क रखता है। इनके जीवन में जलयात्रा के योग बहुत अधिक होते हैं। ऐसे व्यक्ति एकान्त प्रेमी सहृदय एवं मधुर स्वभाव के होते हैं। १०. दशमावस्था : जिस व्यक्ति के हाथ में इस प्रकार की भाग्य रेखा होती है वह निश्चय ही उच्च पद प्राप्त करता है। ऐसा व्यक्ति जीवन में कई बार विदेश यात्राएं करता है अथवा वह वायु सेना में उच्च पद प्राप्त अधिकारी होता है। जीवन में ऐसा व्यक्ति राष्ट्र-स्तरीय सम्मान प्राप्त करता है। इनके जीवन में साहस तथा धैर्य की किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रहती। यदि ऐसी भाग्य रेखा जंजीरदार टूटी हुई या लहरियादार हो तो उसे जीवन में बहुत अधिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है। यदि इस प्रकार की भाग्य रेखा अन्त में जाकर दो भागों में बंट जाय और उसका एक सिरा गुरु पर्वत तथा दूसरा सिरा सूर्य पर्वत की ओर जाता हो तो वह व्यक्ति प्रबल भाग्यशाली होता है। ११. एकादशावस्था : ऐसी भाग्य रेखा बहुत ही कम लोगों के हाथ में देखने को मिलती है। इन व्यक्तियों का व्यक्तित्व अपने आप में भव्य होता है। ये शुक्र की तरह जीवन में चमकते हैं। इनके कार्यों से समाज प्रभावित होता है। देश के दिशा- निर्देश में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इनके विचार इनके कार्य सभी कुछ योजना बद्ध होते हैं। एक साधारण कुल में जन्म लेकर भी ऐसा व्यक्ति सभी दृष्टियों से योग्य सम्पन्न और सुखी होता है। यदि ऐसी रेखा अन्त में जाकर दो भागों में बंट जाय तो वह उच्च स्तर का अधिकारी होता है तथा उसके जीवन में भौतिक दृष्टि से किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रहती। ऊपर मैंने ग्यारह प्रकार के भाग्य रेखा के उद्गम स्थल बतलाये हैं। परन्तु इसके अलावा भी उद्गम स्थल हो सकते हैं। पाठकों को एक बात ध्यान में रखनी