बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १३८ ) चाहिए कि जो भी रेखा शनि पर्वत को स्पर्श करती है वास्तव में वही रेखा भाग्य रेखा कहलाने की अधिकारी होती है । यदि किसी के हाथ में एक से अधिक भाग्य रेखाएं हों और दोनों की समाप्ति शनि पर्वत पर होती हो तो उन दोनों रेखाओं का मिला-जुला फल उस व्यक्ति को जीवन में देखने को मिलेगा । शनि रेखा या भाग्य रेखा की समाप्ति पर यदि कई छोटी-छोटी रेखाएं निकलती हों तो ये रेखाएं व्यक्ति की महत्त्वाकांक्षाओं को सूचित करती हैं । यदि इस प्रकार की रेखाएं नीचे की तरफ गिरती हुई दिखाई दें तो वह व्यक्ति जीवन में बहुत अधिक परेशानियों का सामना करता है । आगे के पृष्ठों में भाग्य रेखा से सम्बन्धित कुछ नए तथ्य स्पष्ट कर रहा हूं । १. यदि भाग्य रेखा सीधी तथा स्पष्ट हो और शनि पर्वत से होती हुई सूर्य पर्वत की ओर जा रही हो तो वह व्यक्ति कला के क्षेत्र में विशेष सफलता प्राप्त करता है । २. यदि यह रेखा लाल रंग की हो तथा मध्यमा उंगली के प्रथम पोर तक पहुंच जाय तो उस व्यक्ति की दुर्घटना में मृत्यु होती है । ३. यदि यह रेखा हृदय रेखा को काटते समय जंजीर के समान बन जाय तो उसे प्रेम के क्षेत्र में बदनामी का सामना करना पड़ता है । ४. यदि हृदय रेखा हथेली के मध्य में फीकी या पतली अथवा अस्पष्ट हो तो व्यक्ति का यौवनकाल दुखमय होता है । ५. यदि व्यक्ति के हाथ में भाग्य रेखा के साथ-साथ सहायक रेखाएं भी हों तो उसका जीवन अत्यन्त सम्मानित होता है । ६. यदि भाग्य रेखा जंजीरदार अथवा लहरदार हो तो जीवन में उसे बहुत अधिक दुख भोगना पड़ता है । ७. जिस व्यक्ति के हाथ में भाग्य रेखा नहीं होती उसका जीवन अत्यन्त साधारण और नगण्य सा होता है । ८. यदि भाग्य रेखा प्रारंभ से ही टेढ़ी-मेढ़ी हो तो उसका बचपन अत्यन्त कष्टदायक होता है । ६. भाग्य रेखा अपने उद्गम स्थल से प्रारंभ होकर जिस पर्वत की ओर भी मुड़ती है या शनि पर्वत से उसमें से कोई शाखा निकलकर जिस पर्वत की ओर जाती है उस पर्वत से सम्बन्धित गुणों का विकास उस व्यक्ति को जीवन में मिलता है । १०. यदि भाग्य रेखा चलते-चलते रुक जाय तो वह व्यक्ति जीवन में बहुत अधिक तकलीफ उठाता है । ११. हथेली में भाग्य रेखा जिस स्थान में भी गहरी, निर्दोष, और स्पष्ट होती है जीवन के उस भाग में उसे विशेष लाभ या सुख मिलता है ।