भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( १३६ ) १२. भाग्य रेखा हथेली में जितनी बार भी टूटती है जीवन में उतनी ही बार महत्वपूर्ण मोड़ आते हैं या कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। १३. यदि भाग्य रेखा मणिबन्ध से प्रारम्भ होकर मध्यमा के ऊपर चढ़े तो वह दुर्भाग्यशाली होता है। जो भाग्य रेखा ऐसी होगी उसे जीवन में किसी प्रकार का कोई सुख या आनन्द नहीं मिलेगा । १४. यदि भाग्य रेखा प्रथम मणिबन्ध से भी नीचे हो अर्थात् प्रथम मणिबन्ध से नीचे उसका उद्गम स्थल हो तो उसे जीवन में जरूरत से ज्यादा कष्ट उठाना पड़ता है। १५. यदि भाग्य रेखा के साथ में कोई सहायक रेखा हो तो यह शुभ कहा जाता है। यदि उंगलियां लम्बी हों और भाग्य रेखा का प्रारंभ चन्द्र पर्वत से हो तो ऐसा व्यक्ति प्रसिद्ध तांत्रिक होता है। १६. यदि चन्द्र पर्वत को काटकर भाग्य रेखा आगे बढ़ती हो तो वह जीवन में कई बार विदेश यात्रा करता है। १७. यदि भाग्य रेखा के उद्गम स्थान पर त्रिकोण का चिह्न हो तो वह व्यक्ति अपनी ही प्रतिभा से उन्नति करता है। १८. यदि भाग्य रेखा से कुछ शाखाएं निकल कर ऊपर की ओर जा रही हों तो उसे अतुलनीय धन लाभ होता है। १६. यदि भाग्य रेखा मस्तिष्क रेखा से प्रारंभ हो और मार्ग में कई जगह आड़ी तिरछी रेखाएं हों तो उस व्यक्ति को बुढ़ापे में सफलता मिलती है। २०. यदि भाग्य रेखा शनि पर्वत पर वृत्ताकार बन जाय तो उसके जीवन में अत्यधिक परिश्रम के बाद सफलता आती है। २१. यदि भाग्य रेखा मस्तिष्क रेखा से प्रारंभ हो और उसकी शाखाएं गुरु सूर्य तथा बुध पर्वत पर जाती हों तो वह व्यक्ति विश्वविख्यात होता है। २२. यदि भाग्य रेखा के उद्गम स्थान पर तीन या चार रेखाएं निकली हुई हों तो ऐसे व्यक्ति का भाग्योदय विदेश में होता है। २३. यदि भाग्य रेखा के उद्गम स्थान से एक सहायक रेखा शुक्र पर्वत की ओर जाती हो तो किसी स्त्री के माध्यम से उसका भाग्योदय होता है। २४. यदि भाग्य रेखा मस्तिष्क रेखा के पास समाप्त हो जाती हो तो उसे जीवन में बार बार निराशा का सामना करना पडता है। २५. भाग्य रेखा पर जितनी ही आड़ी तिरछी रेखाएं होती हैं वे उसकी प्रगति में बाधक कहलाती हैं। २६. यदि भाग्य रेखा की समाप्ति पर तारे का चिह्न हो तो उसकी वृद्धावस्था अत्यन्त कष्टमय होती है।