भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( १४० ) २७. यदि भाग्य रेखा और विवाह रेखा परस्पर मिल जाय तो उसका गृहस्थ जीवन दुखमय रहता है । २८. यदि भाग्य रेखा से कोई सहायक रेखा निकलती हो तो वह भाग्य को प्रबल बनाने में सहायक होती है । २६. यदि इस रेखा के ऊपर या नीचे शाखाएं हों तो उसे आर्थिक कष्ट उठाना पड़ता है । ३०. भाग्य रेखा के अन्त में क्रॉस या जाली हो तो उसकी क्रूर हत्या होती है । ३१. यदि रेखा के अन्त में चतुर्भुज हो तो उस व्यक्ति की धर्म में विशेष आस्था होती है । ३२. भाग्य रेखा पर धन का चिन्ह शुभ माना गया है । ३३. भाग्य रेखा गहरी स्पष्ट और लालिमा लिये हुए होती है तो व्यक्ति जीवन में शीघ्र ही प्रगति करता है । वस्तुतः भाग्य में ही जीवन का सब कुछ सार संगृहीत होता है । अतः जिसकी हथेली में भाग्य रेखा प्रबल, स्पष्ट, और सुन्दर होती है वह व्यक्ति अपने भाग्य से शीघ्र उन्नति करता है और समाज में सम्माननीय स्थान प्राप्त करता हुआ पूर्ण भौतिक सुखों का भोग करता है ।