बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंस्वास्थ्य-रेखा मानव के जीवन में स्वास्थ्य का महत्व सबसे अधिक माना है। व्यक्ति के पास यश, मान, पद, प्रतिष्ठा, तथा ऐश्वर्य हो परन्तु यदि उसके पास स्वास्थ्य की कमी हो तो उसका यह सारा वैभव एक प्रकार से व्यर्थ है। इसलिये शास्त्रों में स्वास्थ्य को सबसे उत्तम धन माना है। हस्तरेखा विशेषज्ञ को चाहिए कि वह जीवन रेखा का अध्ययन करने के बाद सबसे पहले स्वास्थ्य रेखा का ही अध्ययन करे। उत्तम स्वास्थ्य का उसके पूरे जीवन और उसके कार्य-कलापों पर प्रभाव पड़ता है। यदि स्वास्थ्य उत्तम होता है तो वह सब कुछ कार्य कर सकता है, प्रत्येक कार्य में मानसिक और शारीरिक शक्ति लगा सकता है। परन्तु यदि स्वास्थ्य उसका साथ नहीं दे तो उसका जीवन एक प्रकार से व्यर्थ सा हो जाता है। हथेली में स्वास्थ्य-रेखा का उद्गम किसी भी स्थान से हो सकता है परन्तु यह बात निश्चित है कि इसकी समाप्ति बुध पर्वत पर ही होती है। कई बार ऐसा भी देखा गया है कि कोई एक रेखा प्रारंभ होकर बुध पर्वत की ओर आने का प्रयत्न करती है परन्तु बुध पर्वत तक नहीं पहुंच पाती। ऐसी स्थिति में वह रेखा स्वास्थ्य रेखा नहीं कहला सकती। स्वास्थ्य रेखा वह तभी कहला सकती है जबकि वह बुध पर्वत को स्पर्श करे या बुध पर्वत पर पहुंचे। कुछ रेखाएं बुध पर्वत को मात्र स्पर्श करके ही रह जाती हैं ऐसी रेखा को भी बुध रेखा या स्वास्थ्य रेखा मान लेना चाहिए। यह रेखा हथेली के किसी भी भाग से प्रारंभ हो सकती है। मुख्य रूप से इसका प्रारंभ निम्न स्थानों से होता है; १. शुक्र पर्वत से। २. जीवन रेखा के पास से। ३. हृदय रेखा से। ४. चन्द्र पर्वत से। ५. मणिबन्ध से। ६. भाग्य रेखा से। ७. मंगल पर्वत से। जैसा कि मैं ऊपर बता चुका हूं कि स्वास्थ्य रेखा का प्रारंभ कहीं से भी हो सकता है परन्तु उस रेखा की समाप्ति बुध पर्वत पर ही होती है।