बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १४२ ) इस रेखा का भली भांति अध्ययन करना चाहिए। हथेली में यह रेखा जितनी अधिक स्पष्ट, निर्दोष व गहरी होती है संबंधित व्यक्ति का स्वास्थ्य उतना ही ज्यादा श्रेष्ठ एवं उन्नत होता है। उसका शरीर सुगठित और व्यक्तित्व, प्रभावशाली होता है। यदि हथेली में स्वास्थ्य रेखा टूटी हुई हो या कटी-फटी, छिन्न-भिन्न, लहरदार, या जंजीर के समान हो तो उस व्यक्ति का स्वास्थ्य अपने आप में कमजोर होगा। जीवन में उसे किसी भी प्रकार का कोई आनन्द नहीं रह पायेगा। व्यक्ति की हथेली में स्वास्थ्य रेखा का स्पष्ट होना बहुत अधिक जरूरी है। कुछ हथेलियों में स्वास्थ्य रेखा का अभाव भी देखने को मिलता है। इस सम्बन्ध में मेरा यह अनुभव है कि स्वास्थ्य रेखा का न होना भी अपने-आप में एक शुभ संकेत है। जिन व्यक्तियों के हाथों में स्वास्थ्य रेखा नहीं होती। वे स्वस्थ आकर्षक और आनन्ददायक जीवन व्यतीत करने वाले होते हैं। ऐसे व्यक्ति किसी भी प्रकार के रोग से दूर रहते हैं तथा अपने पुरुषार्थ के बल पर सब कुछ करने के लिए तैयार रहते हैं। जिस हथेली में यह रेखा चौड़ी होती है उसका स्वास्थ्य जीवन भर कमजोर रहता है। यदि यह रेखा कड़ी के समान जुड़ी हुई हो तो उसे जीवन भर पेट की बीमारी रहती है। यदि लहर के समान यह रेखा ऊपर की ओर बढ़ रही हो तो उसे जिगर की बीमारी अवश्य ही होती है। इस रेखा का पीलापन इस बात को स्पष्ट करता है कि ऐसा व्यक्ति पीलिया या रक्त से संबंधित बीमारी से पीड़ित रहेगा। स्वास्थ्य रेखा पर जितने अधिक बिन्दु होते हैं उसका स्वास्थ्य उतना ही ज्यादा खराब रहता है। यदि किसी की हथेली में स्वास्थ्य रेखा कई जगह से कटी हुई हो तो वह व्यक्ति जीवन भर बीमार बना रहता है। आगे के पृष्ठों में मैं स्वास्थ्य रेखा से संबंधित कुछ विशेष तथ्य स्पष्ट कर रहा हूं। १. यदि स्वास्थ्य रेखा जीवन रेखा से मिली हुई न हो तो ऐसा व्यक्ति दीर्घायु होता है। २. स्वास्थ्य रेखा जितनी अधिक लम्बी, स्वस्थ और पुष्ट होती है उस व्यक्ति का स्वास्थ्य उतना ही अधिक श्रेष्ठ कहा जाता है। ३. यदि स्वास्थ्य रेखा का प्रारंभ लाल हो तो उसे जीवन में हार्ट की बीमारी होती है। ४. यदि यह रेखा मध्य में लाल हो तो उसका स्वास्थ्य जीवन भर कमजोर बना रहता है। ५. यदि यह रेखा अन्तिम स्थल पर लाल रंग की हो तो उसे सिर दर्द की बीमारी बनी रहती है।