बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १४३ ) ६. यदि यह रेखा कई रंगों की हो तो उसे जीवन में पक्षाघात का सामना करना पड़ता है । ७. यदि यह रेखा पीले रंग की हो तो उसे गुप्त रोग होते हैं । ८. यदि स्वास्थ्य रेखा चन्द्र पर्वत से होती हुई हथेली के किनारे किनारे चल- कर बुध पर्वत तक पहुंचती हो तो वह जीवन में कई बार विदेश यात्राएं करता है । ६. यदि यह रेखा पतली तथा स्पष्ट हो एवं मस्तिष्क रेखा भी पुष्ट हो तो उस व्यक्ति की स्मरण-शक्ति अत्यन्त तीव्र होती है । १०. यदि इस रेखा पर तथा मस्तिष्क रेखा पर धब्बे हों तो व्यक्ति जीवन भर बीमार बना रहता है । ११. यदि हथेली में स्वास्थ्य रेखा सुर्ख रंग की हो तो ऐसा व्यक्ति जरूरत से ज्यादा भोगी तथा कामी होता है । १२. यदि मस्तिष्क रेखा कमजोर हो या स्वास्थ्य रेखा लहरदार हो तो उसे पेट की बीमारी बनी रहती है । १३. यदि बुध पर्वत पर यह रेखा आकर कट जाती हो तो ऐसे व्यक्ति को पित्त दोष होता है । १४. यदि यह रेखा लाल रंग की होकर हृदय रेखा से बढ़ती हो तो उसका हृदय अत्यन्त कमजोर समझना चाहिए । १५. यदि कोई स्वास्थ्य रेखा हृदय रेखा पर क्रास का चिह्न बनाती हो तो उसे मन्दाग्नि रोग रहता है । १६. यदि स्वास्थ्य रेखा से कई सहायक रेखाएं निकलकर ऊपर की ओर बढ़ रही हों तो ऐसे व्यक्ति का स्वास्थ्य अत्यन्त श्रेष्ठ माना जाता है । १७. यदि स्वास्थ्य रेखा लम्बी तथा लहरदार हो पर भाग्य रेखा कमजोर हो तो उसे जीवन में दांतों की बीमारी होती है । १८. यदि स्वास्थ्य रेखा कमजोर हो एवं हृदय रेखा भी कमजोर हो तो व्यक्ति दुर्बल मनोवृत्ति का होता है । १६. यदि स्वास्थ्य रेखा के अन्तिम स्थल पर चतुर्भुज हो तो व्यक्ति दमे के रोग से पीड़ित होता है । २०. यदि उंगलियां कोषदार हों तथा स्वास्थ्य रेखा कमजोर हो तो व्यक्ति -लकवे के रोग से पीड़ित रहता है । २१. यदि स्वास्थ्य रेखा से कई छोटी-छोटी शाखाएं नीचे की ओर जा रही हों तो उसका स्वास्थ्य जीवन भर कमजोर बना रहता है । २२. यदि स्वास्थ्य रेखा से कोई प्रशाखा सूर्य पर्वत की ओर जा रही हो तो उस व्यक्ति के पास अतुलनीय धन होता है ।