बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १४४ ) २३. यदि स्वास्थ्य रेखा की कोई प्रशाखा शनि पर्वत की ओर जा रही हो तो वह व्यक्ति स्वास्थ्य से गंभीर मननशील तथा दीर्घायु होता है । २४. यदि स्वास्थ्य रेखा में चन्द्र रेखा आकर मिल रही हो तो वह व्यक्ति सफल कवि होता है तथा कई बार विदेश यात्राएं करता है । २५. यदि स्वास्थ्य रेखा से कोई प्रशाखा अर्द्धवृत्त सा बनाती हुई मंगल पर्वत की ओर जा रही हो तो वह व्यक्ति सफल भविष्यवक्ता होता है । २६. यदि मनुष्य की हथेली में स्वास्थ्य रेखा चलकर हृदय रेखा को काट रही हो तो उस व्यक्ति को मिर्गी का रोग होता है । २७. यदि लहरदार स्वास्थ्य रेखा भाग्य रेखा को स्पर्श कर लेती है तो उस व्यक्ति का भाग्य जीवन भर कमजोर बना रहता है । २८. यदि ऐसी रेखा मस्तिष्क रेखा को छूती हो तो उस व्यक्ति का दिमाग अत्यन्त कमजोर रहता है । २६. यदि लहरदार स्वास्थ्य रेखा सूर्य पर्वत को स्पर्श करती हो तो वह जीवन में कई बार बदनामी उठाता है । ३०. यदि स्वास्थ्य रेखा लहरदार हो तथा बुध पर्वत को पार करती हो तो उसे व्यापार में जबरदस्त हानि सहन करनी पड़ती है । ३१. यदि उंगलियां नोकीली हों और हथेली में स्वास्थ्य रेखा का अभाव हो तो वह व्यक्ति क्रियाशील होता है । ३२. यदि बुध पर्वत अत्यन्त विक्षिप्त हो और स्वास्थ्य रेखा का अभाव हो तो वह व्यक्ति खुश मिजाज होता है । ३३. यदि लहरदार बुध रेखा मुडकर शुक्र पर्वत की ओर जा रही हो तो उसे प्रेम के क्षेत्र में जबरदस्त धक्का लगता है । ३४. यदि स्वास्थ्य रेखा पर द्वीप का चिह्न हो तो उसे रक्त संबंधी बीमारियां होती हैं तथा उसके फेफड़े कमजोर होते हैं । ३५. यदि स्वास्थ्य रेखा के आस-पास कई छोटी छोटी रेखाएं हों तो उस व्यक्ति का स्वास्थ्य हमेशा कमजोर रहता है । ३६. यदि स्वास्थ्य रेखा जीवन रेखा से बढ़कर मस्तिष्क रेखा तथा हृदय रेखा को स्पर्श करती हुई आगे बढ़ती है तो उसे जीवन में कमजोरी रहती है । ३७. यदि जीवन रेखा के साथ यह रेखा जुड़ी हुई हो परन्तु इस रेखा पर नीले धब्बे हों तो उसे हृदय रोग की शिकायत बनी रहती है । ३८. यदि मस्तिष्क रेखा के अन्त में तथा स्वास्थ्य रेखा के अन्त में क्रॉस हो तो वह व्यक्ति सफल होता है ।