भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 174, कुल 350 में से

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( १७३ ) १२. सूर्य रेखा पर यदि वृत्त का चिन्ह हो तो वह अपने जीवन में असाधारण सफलता प्राप्त करता है तथा भौतिक दृष्टि से वह पूर्ण सुखी एवं सम्पन्न होता है । १३. भाग्यरेखा पर वृत्त का चिन्ह व्यक्ति को भाग्यहीन बनाता है तथा जीवन-भर उसे परेशानियां भोगनी पड़ती हैं । १४. यदि यात्रा रेखा पर वृत्त का चिन्ह हो तो यात्रा में वह मरण-तुल्य कष्ट उठाता है । ५. द्वीप : हथेली में यह चिन्ह कहीं पर भी दिखाई दे सकता है । जिस स्थान पर भी यह चिन्ह होता है उस स्थान के प्रभाव को यह कमजोर करने में ही सहायक होता है । १. गुरु पर्वत पर यदि द्वीप का चिन्ह हो तो उस व्यक्ति के आत्म-विश्वास में कमी आती है तथा उसे अपने आप पर ही भरोसा नहीं रहता । २. शनि पर्वत पर द्वीप का चिन्ह व्यक्ति को पग-पग पर परेशानियां देने में सहायक होता है । ३. यदि रवि पर्वत पर द्वीप का चिन्ह हो तो वह व्यक्ति हमेशा निराशावादी भावना लिये हुए जीवित रहता है तथा उसका स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है । ४. बुध पर्वत पर द्वीप का चिन्ह व्यापार या विज्ञान से सम्बन्धित कार्यों में हानि पहुंचाता है । ऐसे व्यक्ति को समाज में निन्दा का पात्र बनना पड़ता है । ५. यदि हथेली में चन्द्र पर्वत पर द्वीप हो तो उसका स्वभाव क्रूर तथा निर्दयी होता है । ६. शुक्र पर्वत पर द्वीप का चिन्ह पारिवारिक जीवन में घातक माना गया है । जीवन में चारों ओर से उसे निराशा का सामना करना पड़ता है । ७. जीवन रेखा पर यदि द्वीप हो तो व्यक्ति सैक्स की दृष्टि से कमजोर होता है । ८. मस्तिष्क रेखा पर द्वीप दिमाग से सम्बन्धित रोगों से पीड़ित रखता है । ९. हृदय रेखा पर यदि द्वीप का चिन्ह हो तो उसके जीवन में बराबर हृदय रोग बना रहता है । १०. यदि सूर्य रेखा पर द्वीप हो तो उसे जीवन में कई बार बदनामियों का सामना करना पड़ता है ।

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