बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १७५ ) ९. यात्रा रेखा पर वर्ग की उपस्थिति इस बात की सूचक होती है कि वह जीवन में कई बार यात्राएं करेगा तथा यात्राओं से विशेष धन लाभ लेगा । १०. चन्द्र रेखा पर वर्ग की उपस्थिति मानव की सभी प्रकार की उन्नति में सहायक होती है । ११. यदि विवाह रेखा पर वर्ग का चिन्ह हो तो उसकी पत्नी पढ़ी-लिखी, सुन्दर, सुशील तथा शिक्षित होती है । तथा उसे ससुराल से विशेष धन लाभ होता है । १२. यदि स्वास्थ्य रेखा पर वर्ग हो तो उसका व्यक्तित्व आकर्षक और जीवन भर स्वास्थ्य अनुकूल बना रहता है । १३. यदि भाग्य रेखा पर वर्ग का चिन्ह हो तो ऐसे व्यक्ति का भाग्योदय छोटी अवस्था में ही हो जाता है । १४. सूर्य पर्वत पर अथवा सूर्य रेखा पर वर्ग का चिन्ह हो तो उसके जीवन में यश, मान, पद, प्रतिष्ठा आदि की कोई कमी नहीं रहती । १५. यदि हृदय रेखा पर वर्ग का चिन्ह हो तो उसका गृहस्थ जीवन सुखमय होता है तथा वह हृदय से परोपकारी एवं दयालु होता है । १६. मस्तिष्क रेखा पर वर्ग का चिन्ह इस बात का सूचक है कि ऐसे व्यक्ति का दिमाग सन्तुलित तथा निरन्तर क्रियाशील है । १७. यदि जीवन रेखा पर वर्ग का चिन्ह हो तो वह व्यक्ति दीर्घायु होता है । १८. यदि राहू पर्वत पर वर्ग का चिन्ह हो तो उसका काफी समय साधु के रूप में जंगलों में व्यतीत होता है । वस्तुतः वर्ग का चिन्ह हथेली में कहीं पर भी हो वह पूर्णतः शुभ माना जाता है । ७. जाल : खड़ी रेखाओं पर आड़ी रेखाएं होने से एक प्रकार का जाल-सा बन जाता है। यह व्यक्ति की हथेलियों में सभी स्थानों पर देखने को मिल जाता है। इन स्थानों पर पड़े इन जालों का फलादेश निम्न प्रकार से है : १. यदि गुरु क्षेत्र पर जाल चिन्ह हो तो ऐसा व्यक्ति क्रूर, निर्दयी, स्वार्थी, तथा घमण्डी होता है । २. यदि शनि पर्वत पर जाल का चिन्ह हो तो ऐसा व्यक्ति आलसी होता है तथा समाज में कंजूस होने की वजह से बदनामी सहन करनी पड़ती है । ३. यदि यह रेखा जाल सूर्य पर्वत पर हो तो समाज में बार-बार निन्दा का पात्र बनना पड़ता है । जाल