बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १७६ ) ४. यदि बुध पर्वत पर जाल हो तो वह व्यक्ति अपने ही किये गये कार्यों पर पछताता है तथा परेशानियां उठाता है । ५. यदि प्रजापति क्षेत्र पर जाल का चिन्ह हो तो उस व्यक्ति के हाथ से अवश्य ही हत्या होती है तथा उसे कारावास का दण्ड भोगना होता है । ६. यदि चन्द्र क्षेत्र पर जाल का चिन्ह हो तो वह अस्थिर स्वभाव वाला तथा असन्तुष्ट व्यक्तित्व का स्वामी होता है । ७. यदि केतु पर्वत पर जाल हो तो वह जीवन भर बीमारियों से परेशान रहता है । ८. यदि शुक्र पर्वत पर जाल हो तो वह व्यक्ति जरूरत से ज्यादा भोगी तथा लम्पट होता है । समाज में उसका किसी प्रकार का कोई स्थान नहीं होता । ६. यदि मंगल क्षेत्र पर जाल हो तो वह जीवन भर मानसिक दृष्टि से अशान्त बना रहता है । १०. यदि राहू पर्वत पर जाल का चिन्ह हो तो ऐसा व्यक्ति दुर्भाग्य पूर्ण जीवन व्यतीत करने के लिये बाध्य होता है । ११. यदि मणिबन्ध रेखा पर हो तो उसका जरूरत से ज्यादा पतन होता है । १२. हथेली में कहीं पर भी जाल का चिन्ह अनुकूल फल देने वाला नहीं माना जाता । ८. नक्षत्र या तारा : हथेली में कई स्थानों पर सूक्ष्मतापूर्वक देखने से नक्षत्र या तारे दिखाई देते हैं । अलग-अलग स्थानों में होने से इनके फलादेश में भी अन्तर आ जाता है । १. यदि गुरु पर्वत पर नक्षत्र का चिन्ह हो तो वह व्यक्ति निश्चय ही अपने जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त करता है । समाज में धन, मान, पद, प्रतिष्ठा, आदि की दृष्टि से उसके जीवन में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रहती । वह निरन्तर उन्नति की ओर अग्रसर रहता है तथा सम्माननीय पद प्राप्त कर समाज में पूर्ण सफलता प्राप्त करता है । २. यदि शनि पर्वत पर नक्षत्र या तारे का चिन्ह हो तो ऐसे व्यक्ति का भाग्योदय शीघ्र ही होता है । वह अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रहता है तथा जीवन में पूर्ण यश तथा सम्मान प्राप्त करने में सफल होता है ।