भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( १७८ ) १६. यदि हृदय रेखा पर नक्षत्र का चिन्ह हो तो वह हृदय से संबंधित रोगों से पीड़ित रहता है । १७. यदि मस्तिष्क रेखा पर नक्षत्र या तारे का चिन्ह हो तो वह जीवन भर स्नायु संबंधी रोगों से ग्रस्त रहता है । १८. यदि आयु रेखा पर नक्षत्र का चिन्ह हो तो उस व्यक्ति की यौवनकाल में ही आकस्मिक मृत्यु हो जाती है । १९. यदि अंगूठे पर नक्षत्र का चिन्ह हो तो वह व्यक्ति परिश्रमी, सहनशील तथा सफल व्यक्तित्व का धनी होता है । २०. तर्जनी उंगली पर नक्षत्र का चिन्ह सभी प्रकार से शुभ माना गया है । २१. मध्यमा तथा अन्य उंगलियों पर नक्षत्र के चिन्ह से उससे संबंधित ग्रहों को विशेष बल मिलता है । वस्तुतः हाथ में नक्षत्र या तारे के चिन्ह का सावधानी पूर्वक अध्ययन करना चाहिए । ये चिन्ह व्यक्तित्व के निर्माण में तथा भविष्यकथन में बहुत अधिक सहायक होते हैं ।