बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
पृष्ठ 180, कुल 350 में से
संदर्भ में पढ़ेंकाल-निर्धारण
पीछे के अध्यायों में मैंने हस्त रेखा से संबंधित तथ्य स्पष्ट किए हैं, साथ ही साथ सहायक रेखाओं तथा हस्त चिन्हों के बारे में भी जानकारी प्रस्तुत की है। परन्तु इसके साथ ही यह प्रश्न भी व्यक्ति के दिमाग में स्वाभाविक रूप से पैदा होता है कि जीवन में अमुक घटनाएं घटित होंगी, यह तो हस्तरेखा ज्ञान से स्पष्ट हो जाता है; परन्तु ये घटनाएं किस अवधि में घटित होंगी इसको समझना और जानना भी बहुत जरूरी है। व्यक्ति के जीवन में ये प्रश्न निरन्तर चक्कर लगाते रहते हैं कि भाग्योदय कब होगा, किस प्रकार के कार्य से भाग्योदय होगा, भाग्योदय इसी देश में होगा या बिदेश में होगा, विदेश यात्रा कब है नौकरी कब मिलेगी, व्यापारमें स्थिरता कब आ सकेगी, व्यापार में कितना लाभ होगा और कब होगा, किस वस्तु या किस कार्य से व्यापार में लाभ सम्भव है, आय वृद्धि कब होगी, नौकरी में प्रमोशन कब होगा, सन्तान सुख कैसा मिलेगा, विवाह कब होगा - आदि ऐसी सैकड़ों बातें हैं जो मानव मस्तिष्क में निरन्तर घुमड़ती रहती हैं इन सभी के लिये यह बहुत जरूरी है कि हम काल निर्धारण प्रक्रिया को समझें और उसके माध्यम से भविष्य कथन को स्पष्ट कर सकें। पीछे के पृष्ठों में मैंने हृदय रेखा, भाग्य रेखा, स्वास्थ्य रेखा, मस्तिष्क रेखा तथा जीवन रेखा आदि के बारे में जानकारी दी है। इनमें जीवन रेखा का सर्वप्रथम अध्ययन जरूरी है। जैसा कि मैं पीछे बता चुका हूं कि अंगूठे और तर्जनी के बीच में से जीवन रेखा प्रारंभ होकर शुक्र पर्वत को घेरती हुई मणिबन्ध तक पहुंचती है। यह जीवन रेखा कहलाती है। पहले अभ्यास के लिये किसी धागे के माध्यम से जहां से यह जीवन रेखा प्रारंभ होती है वहां से लगाकर जीवन रेखा के अन्तिम स्थल अर्थात् मणिबन्ध की पहली रेखा तक नापिये और इस पूरे धागे को १०० वर्ष का समझकर इसके बराबर १० हिस्से कर लीजिये। इस प्रकार एक हिस्सा १० वर्षों का प्रतिनिधित्व करेगा। इन १० वर्षों में भी जो दूरी है उसको यदि १० भागों में बांटें तो प्रत्येक भाग एक वर्ष का प्रतिनिधित्व करेगा। यद्यपि ये चिन्ह नजदीक हो सकते हैं, परन्तु यह प्रत्येक