भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( १८० ) चिन्ह एक वर्ष को सूचित करेगा । अभ्यास के बाद चिन्ह लगाने की आवश्यकता ही नहीं रहेगी और हाथ देखकर ही यह अनुमान हो सकेगा कि यह जीवन रेखा कितने वर्ष का प्रतिनिधित्व करती है। यदि जीवन रेखा बीच में ही समाप्त हो जाती है, तो आयु के उस भाग में जीवन समाप्त समझना चाहिए । इससे यह भली भाँति ज्ञात हो सकेगा कि व्यक्ति की आयु कितने वर्ष की है। इसी प्रकार जीवन रेखा पर जहाँ भी क्रॉस का चिन्ह या जहां भी रेखा कमजोर पड़ी है आयु के उस भाग में बहुत बड़ी बीमारी आयेगी या मरण तुल्य कष्ट भोगना पड़ेगा, ऐसा समझना चाहिए। पूरे हाथ में घटनाओं को सूचित करने वाली जीवन रेखा ही है। अन्य जो भी रेखाएं हैं, उन पर बिन्दु लगा कर उससे एक सीधी रेखा जीवन रेखा की ओर खींचिये, जिस बिन्दु पर खींची हुई रेखा मिलेगी; आयु के उस भाग में ही वह घटना घटित होगी। उदाहरण के लिये भाग्य रेखा के मध्य में कटा हुआ हिस्सा है तो कटे हुए स्थान से यदि हम रेखा खींचें और वह रेखा जीवन रेखा के ४२वें वर्ष के बिन्दु से मिलती हो तो इससे यह सिद्ध हो जाता है कि इस व्यक्ति की ४२वें वर्ष में भाग्य-बाधा आयेगी और भाग्य से संबंधित कोई बहुत बड़ा कष्ट उठाना पड़ेगा। इसी प्रकार आप अन्य रेखाओं पर पाये जाने वाले चिन्हों का फल ज्ञात कर सकते हैं एवं उन घटनाओं को घटित होने का समय भी स्पष्ट कर सकते हैं। धीरे-धीरे इस संबंध में अभ्यास करना चाहिए। अभ्यास के बाद तो मात्र हथेली पर एक झलक पड़ने पर ही संबंधित घटना और उसका समय ज्ञात हो सकता है। वस्तुतः एक सफल भविष्यवक्ता एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ तभी माना जाता है जबकि वह घटनाओं का समय सही-सही रूप में स्पष्ट कर सके और इसके लिये मैंने ऊपर बिन्दु स्पष्ट कर दिये हैं।