बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहस्त-चित्र लेने की रीति
मेरे केन्द्र में हमेशा सैकड़ों पत्र आते हैं और उनका यह आग्रह रहता है कि हस्त-चित्रों के माध्यम से सही भविष्यफल स्पष्ट करके भेजा जाए। इस केन्द्र की सेवाएं देश में तथा विदेशों में सभी लोगों को सुलभ हैं और मेरे लिये यह प्रसन्नता का विषय है कि लोगों ने इस सेवा का भरपूर लाभ उठाया है। यद्यपि हस्तचित्रों की अपेक्षा व्यक्तिगत रूप से हाथ दिखाना और उससे भविष्य-फल ज्ञात करना ज्यादा अनुकूल होता है। क्योंकि इसके माध्यम से पर्वतों का उभार और छोटी से छोटी रेखाओं को भली प्रकार से जाना जा सकता है, परन्तु यह सभी के लिये सुलभ नहीं है। जो दूर हैं, या जो विदेशों में हैं उनके लिये हस्तचित्र ही एक ऐसा माध्यम होता है जिसके द्वारा वे अपना भविष्यफल ज्ञात कर सकते हैं। जहां तक मेरा अनुभव है एक अच्छे कैमरे से ही हाथ का सही-सही फोटो लिया जा सकता है और इसमें भी ग्रहों के पर्वतों का उभार देखा जा सकता है। इसके साथ ही कैमरे की आंख से छोटी से छोटी रेखा भी छिपी नहीं रहती और हथेली में सभी रेखाएं पूर्ण रूप से फोटो में आ जाती हैं जिसके माध्यम से सही-सही भविष्यफल स्पष्ट किया जा सकता है। मेरी राय में जो सही भविष्यफल चाहते हैं, उन्हें अपने दोनों हाथों के फोटो कुशल फोटोग्राफर से खिंचवा कर भेजने चाहिए। जहां फोटो की सुविधा न हो तो वे कागज पर हस्तचित्र उतार करके भी भेज सकते हैं। परन्तु इसके बारे में बहुत अधिक सावधानी बरतनी चाहिए। जैसे— १. कागज सफेद हो तथा खुरदरा नहीं होना चाहिए। यह बात भी ध्यान रखनी चाहिए, कि कागज न तो बहुत पतला हो और न चिकना हो। स्याही सोखने वाला कागज भी नहीं लिया जाना चाहिए। २. कागज पर चित्र उतारते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कागज की लम्बाई और चौड़ाई अपने आप में पूरी हो। हथेली का कोई भी हिस्सा या उंगली का कोई भी हिस्सा कागज के बाहर नहीं रहना चाहिए। ३. चित्र लेते समय हाथ साबुन से धुले हुए होने चाहिए तथा उंगली में किसी प्रकार की कोई अंगूठी पहनी हुई नहीं होनी चाहिए।