बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १८२ ) विधियां नीचे की पंक्तियों में मैं तीन चार विधियों का परिचय दे रहा हूँ जिनके माध्यम से हाथों का स्पष्ट चित्र ज्ञात किया जा सकता है । १. धुंयें के द्वारा चित्र उतारना :- एक सफेद चिकना और थोड़ा सा कड़ा कागज लें जो कि व्यक्ति की हथेली से बड़ा हो और पूरा हाथ उस कागज पर रखते समय चारों तरफ ३-३ उंगल खाली रह सके । इसके बाद एक कटोरी में शुद्ध कपूर की टिकियाएं रखकर उस में लौ या आग या माचिस लगा देनी चाहिए और कागज को दोनों हाथों से पकड़कर कटोरी के थोड़ा ऊपर रखना चाहिए पर इसमें यह साव- धानी बरतनी बहुत जरूरी है कि कपूर की आग उस कागज को पकड़ न ले या आंच से कागज जल न जाय । हमारा उद्देश्य मात्र इतना ही है कि उससे उत्पन्न धुएं से कागज के नीचे का हिस्सा काला हो जाए । धीरे-धीरे कागज को इधर-उधर घुमाते रहना चाहिए जिससे चारों तरफ से वह काला हो जाय । साथ ही वह कागज सुरक्षित भी रहे । यह भी ध्यान रखें कि बहुत जल्दी उस कागज को अलग न ले-लें बल्कि उस पर धुएं की मोटी परत जमने दें । इसमें सावधानी यह बरतें कि सभी जगह धुएं की परत बराबर जमें जिससे पूरे कागज में एक रूपता आ पायेगी । यदि कटोरी में एक कपूर की टिकिया समाप्त हो जाए तो उसमें दूसरी टिकिया डाल दें । यह कार्य प्रारंभ करने से पूर्व ८-१० टिकियाएं अपने पास निकाल कर रख लेनी चाहिए । जब कागज के नीचे का हिस्सा सभी जगह बराबर काला हो जाए तब उसे पलट कर किसी साफ चिकनी मेज पर रख दें । मेज पर कपड़ा बिछा हुआ नहीं होना चाहिए अर्थात् कागज के नीचे ठोस धरातल और साथ ही साथ चिकना धरातल होना आवश्यक है । कागज पर जो कालिख लगी हुई है वह ऊपर की ओर हो । अब आप अपना हाथ फैला कर उस कागज के ऊपर जमा दें । यह ध्यान रखें कि आपकी सभी उंगलियां तथा मणिबन्ध तक का हिस्सा उस कागज पर पूरी तरह से आ जाए । अब आप अपने हाथ को दबाव दें जिससे आपके हाथ की सभी रेखाएं उस कागज पर आ जाए । अब आप बिना हिलाये अपने हाथ को सीधे ऊपर उठा लें । आप देखेंगे कि आपके हाथ का चित्र और हथेली की प्रत्येक छोटी से छोटी रेखा कागज पर सही रूप में उत्तर आई है । यदि कागज के बीच के हिस्से में नीचे छोटा सा रूमाल रख दिया जाए और रूमाल वाले भाग पर आपकी हथेली का बीच का हिस्सा टिके तो ज्यादा उचित रहेगा और कोई भी स्थान खाली नहीं रहेगा ।