भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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प'चांगुली देवी

पीछे के अध्यायों में मैंने हाथ की रेखाओं तथा पर्वतों के बारे में विस्तार से स्पष्ट किया है । परन्तु पंचांगुली देवी के बारे में जानकारी स्पष्ट नहीं कर सका हूं । इस अध्याय में इससे सम्बन्धित संक्षिप्त जानकारी प्रस्तुत कर रहा हूं । जिस व्यक्ति को इसके बारे में विस्तार से अध्ययन करना हो उसे मेरी पुस्तक 'हस्तरेखा विज्ञान और पंचांगुली साधना' का अध्ययन करना चाहिए ।


(चित्र शीर्षक: श्री पञ्चाङ्गुली देवी)

पंचांगुली देवी के बारे में अनेक प्राचीन ग्रन्थों में उल्लेख मिलता है और उसमें यह स्पष्ट किया गया है, कि यदि कोई व्यक्ति नियम पूर्वक पंचांगुली देवी की साधना करे तो शीघ्र ही वह सफल भविष्यवक्ता बन सकता है । किसी भी व्यक्ति का हाथ देखते ही उस व्यक्ति का भूत, वर्तमान और भविष्य उसके सामने साकार हो जाता है । साथ ही वह अनेक सूक्ष्म रहस्यों से भी भली भांति परिचित हो जाता है ।