बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
पृष्ठ 20, कुल 350 में से
संदर्भ में पढ़ें( १६ ) सामना करने की इनमें क्षमता नहीं रहती। परिस्थितियों को चुनौती देना इनके वश की बात नहीं है। हाथ के प्रकार जान लेने के साथ ही साथ कुछ और तथ्य भी जान लेने चाहिए। हाथ चौड़ा या तंग हो सकता है। नरम अथवा सख्त अनुभव हो सकता है। इसी प्रकार जब हम किसी का हाथ अपने हाथ में लेते हैं तो वह खुश्क अथवा नम अनुभव हो सकता है। ये सारे तथ्य एक हस्तरेखा विशेषज्ञ के लिए समझ लेने आवश्यक होते हैं। हाथ देखते समय यह बात भी समझ लेनी चाहिए कि उंगलियों के सिरे नुकीले हैं या वर्गाकार हैं अथवा चपटाकार हैं। एक पर्व और दूसरे पर्व के बीच में जो गांठें होती हैं, उनका भी अध्ययन किया जाना चाहिए। ये गांठें मोटी अथवा पतली हो सकती हैं। इसी प्रकार प्रत्येक उंगली की लम्बाई भी अपने आप में महत्व रखती है। यह बात अनुभव से सिद्ध हुई है कि जिस व्यक्ति की कनिष्ठिका अर्थात् सबसे छोटी उंगली का ऊपरी सिरा यदि अनामिका उंगली के तीसरे पर्व से आगे की ओर बढ़ा हुआ हो तो वह व्यक्ति विशेष बुद्धिमान, प्रतिभावान तथा ऊंचे पद पर पहुंचने वाला होता है। जिन व्यक्तियों के हाथों में सबसे छोटी उंगली को लंबा पाया जाता है, वे व्यक्ति वास्तव में ही अपने जीवन में सफल होते देखे गए हैं। मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि हमको हाथ का अध्ययन करते समय उंगलियों की लम्बाई पर भी ध्यान रखना चाहिए। उंगलियों के नाम प्रत्येक व्यक्ति के हाथ में चार उंगलियां तथा एक अंगूठा होता है। अंगूठे को अंगुष्ठ भी कहा जाता है तथा इसके दो भाग होते हैं :— १. तर्जनी :— यह उंगली अंगूठे के पास वाली होती है, इसको तर्जनी उंगली कहा जाता है। इसके तीन पर्व होते हैं। इस उंगली का अध्ययन करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि इसका सिरा किस प्रकार का है तथा उसका झुकाव किस तरफ है। झुकाव तीन प्रकार के होते हैं। कुछ उंगलिया बिल्कुल सीधी होती हैं जबकि कुछ उंगलियां अंगूठे की तरफ झुकी हुई होती हैं। इसी प्रकार कुछ उंगलियां मध्यमा की तरफ झुकी हुई हो सकती हैं।