बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
पृष्ठ 21, कुल 350 में से
संदर्भ में पढ़ें( २० ) २. मध्यमा :—यह हाथ में सबसे बड़ी उंगली होती है, तथा इसको संस्कृत में मध्यमा उंगली कहा जाता है। इसके बारे में अध्ययन करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि इसके पवों के बीच जो गांठें हैं वे गांठें बहुत ज्यादा फूली हुई हैं अथवा मामूली हैं। ऐसे बहुत कम हाथ देखे जाते हैं जिनमें तर्जनी तथा मध्यमा उंगली बराबर हो। परन्तु जिस हाथ में भी तर्जनी तथा मध्यमा उंगली बराबर हों वह व्यक्ति आत्म-हत्या करता है या उसकी मृत्यु स्वाभाविक रूप से नहीं होती। ३. अनामिका :—मध्यमा के पास वाली उंगली को अनामिका उंगली कहते हैं। सामान्यतः यह उंगली मध्यमा उंगली से छोटी होती है तथा लगभग तर्जनी उंगली के बराबर लम्बी होती है इस उंगली के झुकाव का विशेष अध्ययन करना चाहिए। यदि उस अंगुली का झुकाव मध्यमा की तरफ हो तो वह ज्यादा अच्छी तथा श्रेष्ठ कही जाती है। विपरीत दिशा में झुकाव होने से ऐसा प्रतीत होता है कि उस व्यक्ति का गृहस्थ जीवन ज्यादा सुखमय नहीं रह सकेगा। ४. कनिष्ठिका :—यह हाथ की सबसे छोटी उंगली होती है तथा सामान्यतः इसका अंतिम सिरा अनामिका के ऊपरी सिरे तक अर्थात् ऊपरी जोड़ तक पहुंचता है