बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २१ ) परन्तु जिस व्यक्ति के हाथ में यह उंगली जरूरत से ज्यादा लम्बी होती है, वह व्यक्ति निश्चय ही सौभाग्यशाली होता है और अपने प्रयत्नों से वह उच्चस्तरीय सम्मान प्राप्त करता है। [चित्र विवरण: कनिष्ठा, बुधकी ऊँगली, ७६५] हाथ की बनावट हड्डियों के पतले तथा भारी होने से हाथों के प्रकार में अन्तर आ जाता है। इस प्रकार से हम हाथों को सात वर्गों में बांट सकते हैं जो कि निम्नलिखित हैं : १. प्रारम्भिक प्रकार २. वर्गाकार हाथ ३. कर्मठ हाथ ४. दार्शनिक हाथ ५. कलात्मक हाथ ६. आदर्श हाथ ७. मिश्रित हाथ आगे की पंक्तियों में इन हाथों की विशेषताओं को मैं स्पष्ट कर रहा हूं :— १. प्रारम्भिक प्रकार :—सामान्यतः ऐसा हाथ खुरदरा, भारी तथा मोटा-सा होता है। इस हाथ की बनावट बेडौल तथा असुन्दर होती है एवं इसकी उंगलियां असमान-सी अनुभव होती हैं। सही रूप में देखा जाए तो ऐसे व्यक्ति पूर्ण सभ्य नहीं कहे जा सकते। नकल करने की प्रवृत्ति इनमें विशेष रूप से होती है। ये सभ्य हो सकते हैं परन्तु संस्कृति के जो गुण होने चाहिए वे इन व्यक्तियों में नहीं पाये जा सकते ।