बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २२ ) एक प्रकार से ये व्यक्ति पूर्णतः भौतिकवादी होते हैं। इनके जीवन का परम उद्देश्य भोजन, वस्त्र और आवास ही होता है। इसके आगे जीवन के मूल्यों को न तो ये समझते हैं और न समझने का प्रयत्न ही करते हैं। एक प्रकार से आदर्श एवं जीवन मूल्यों की दृष्टि से ये सर्वथा कोरे होते हैं। यद्यपि यह बात सही है कि ये व्यक्ति परिश्रमी होते हैं और जो कुछ भी जीवन में उपार्जित करते हैं वह सब परिश्रम के बल पर ही संभव है। छोटी-छोटी बातों पर क्रोधित हो जाना या उफन जाना इनका स्वभाव होता है। कानून तोड़ना इनके लिए बायें हाथ का खेल होता है। सामाजिक एवं नैतिक दृष्टि से ये व्यक्ति अपराधी वर्ग के अन्तर्गत आते हैं। २. वर्गाकार हाथ :— यदि हाथ को उल्टा करके देखें तो ऐसा हाथ तुरन्त पहचानने में आ जाता है। इस प्रकार के हाथों में ग्रन्थियां विशेष रूप से होती हैं तथा
५x 'वर्गाकार' हाथ