बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २३ ) अस्थि प्रधान बेडौल हाथ ही इस वर्ग में आता है परन्तु प्रारम्भिक प्रकार के हाथ और इस हाथ में यह अन्तर होता है कि इस प्रकार के हाथ की उंगलियों में एक विशेष प्रकार की लचक होती है, जिससे इस हाथ को आसानी से पहचाना जा सकता है। ऐसे हाथ प्रारम्भिक प्रकार के हाथों की अपेक्षा पतले और कम खुरदरे होते हैं। ऐसे व्यक्ति प्रतिभा सम्पन्न एवं बुद्धिजीवी होते हैं। समाज को इनका योगदान बराबर रहता है। ऐसे व्यक्ति ही समाज का नेतृत्व करने में सक्षम होते हैं तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए कुछ विशेष धरोहर देकर जाते हैं। ऐसे हाथ वाले व्यक्ति दार्शनिक, कलाकार, चित्रकार, साहित्यकार, मनोवैज्ञानिक आदि होते हैं। यद्यपि यह बात सही है कि इस प्रकार के व्यक्तियों के पास धन का अभाव होता है परन्तु ये अपने जीवन में धन को इतना अधिक महत्व नहीं देते जितना कि अपनी प्रतिष्ठा को, सम्मान को और कीर्ति को देते हैं। ३. कर्मठ हाथ : यह हाथ चौड़ाई की अपेक्षा लम्बाई लिए हुए होता है। हाथ का प्रारम्भ कुछ थुलथुला-सा तथा आगे का भाग उसकी अपेक्षा कुछ हल्का होता है। हथेली पर पाये जाने वाले पर्वत मांसल और कठोर होते हैं तथा अधिकतर पर्वत दबे हुए एवं भारी होते हैं। ऐसे व्यक्ति अपने जीवन में बराबर सक्रिय बने रहते हैं और कोई न कोई काम करते ही रहते हैं। खाली बैठना इनको अपने जीवन में अच्छा नहीं लगता। अत्यन्त साधारण श्रेणी में जन्म लेकर भी ये अपने परिश्रम से अपनी स्थिति को अनुकूल बना लेते हैं और जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त कर लेते हैं। इनके कार्यों में विचार, भावना एवं पुरुषार्थ का प्रबल सामंजस्य रहता है। 'कर्मठ' हाथ ऐसे व्यक्ति भावनाओं द्वारा अपने कार्य का संचालन नहीं करते अपितु इनके जीवन में भावना तथा व्यावहारिकता का पूर्ण समन्वय होता है। जीवन में नये-नये कार्यों की तरफ अग्रसर होना, नई से नई वस्तु की खोज करना तथा कुछ न कुछ नया करते रहना इनका स्वभाव होता है। सफल व्यक्तित्व इस प्रकार से इनकी विशेषता कही जा सकती है। ४. दार्शनिक हाथ : ऐसा हाथ फूला हुआ, गठीले जोड़ों से युक्त तथा सामा- न्तया गुदगुदा-सा होता है। यह हाथ न तो विशेष कठोर होता है और न विशेष कोमल। हाथ में लेते ही यह ऐसा प्रतीत होता है कि मानो इस हाथ में एक विशेष प्रकार की लचक और लय हो। ये अपेक्षाकृत पतले, कोमल और मृदुल हाथ होते हैं।