भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( २४ ) जिनके हाथ दार्शनिक वर्ग के होते हैं, वे व्यक्ति योग्य विद्वान एवं बुद्धिजीवी होते हैं। समाज के लिए ये व्यक्ति ज्यादा उपयोगी तथा नेतृत्व देने वाले सिद्ध हुए हैं। समाज जिन कार्यों से ऊंचा उठता है या देश जिन कार्यों से गौरवान्वित होता है, ऐसे कार्य इन्हीं प्रकार के व्यक्तियों द्वारा सम्पन्न होते हैं। ऐसे व्यक्ति आदर्श एवं विश्वासों के प्रति पूरी-पूरी आस्था रखते हैं। ज्ञान के क्षेत्र में ये जिज्ञासु बने रहते हैं तथा ज्ञान और बुद्धि में सदैव तत्पर एवं लोगों के लिए हितकारी देखे जा सकते हैं। बड़े-बड़े दार्शनिक, विचारक एवं बुद्धिजीवी इसी प्रकार के

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'दार्शनिक' हाथ