बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
पृष्ठ 207, कुल 350 में से
संदर्भ में पढ़ेंटिप्पणी : इसमें चन्द्र रेखा पर विशेष बल है और ध्यान में रखने की बात यह है कि चन्द्र रेखा का झुकाव तो बुध पर्वत की ओर ही होना चाहिए, परन्तु उसकी एक शाखा ऊपर की ओर उठती हुई अन्य पर्वत की ओर अवश्य ही पहुँचनी चाहिए । शकट योग : परिभाषा : यदि हथेली में शनि पर्वत एवं चन्द्र पर्वत दबे हुए हों । शुक्र पर्वत पर जरूरत से ज्यादा आड़ी तिरछी रेखाएं हों तथा भाग्य रेखा अत्यन्त कमजोर हो तो उसकी हथेली में शकट योग बनता है । फल : शकट योग में जिस व्यक्ति का जन्म होता है, वह जीवन भर अभाग्यशाली ही रहता है । उसके जीवन में बरा- बर संघर्ष बना रहता है, तथा कई बार जीवन में कर्ज लेकर के काम चलाना पड़ता है । समाज में इसका कोई सम्मान नहीं होता और उसका जीवन एक साधारण स्तर का ही व्यतीत होता है । (चित्र: शकट योग) टिप्पणी : जिसके हाथ मे शकट योग होता है उसमें ऊपर लिखा फल ही अधिकतर मिलता है, परन्तु यदि उसके हाथ में बुध पर्वत तथा गुरु पर्वत विकसित हो और गुरु पर क्रॉस का चिह्न हो तो शकट योग का इतना बुरा फल उसे देखने को नही मिलता । दरिद्र योग : परिभाषा : यदि हथेली मे सभी पर्वत कमजोर हो तथा चन्द्र पर्वत पर बिन्दु हो साथही बुध की उंगली पर तारे का चिह्नहो तो उसकी हथेली में दरिद्र योग बनता है । फल : दरिद्र योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति चाहे करोड़पति के घर में भी जन्म ले फिर भी वह अपने दुष्कर्मों के कारण संचित पूंजी समाप्त कर देता है । तथा उसे दरिद्र जीवन बिताने को बाध्य होना पडता है । उसका सम्पूर्ण जीवन सभी दृष्टियों से सामान्य स्तर का होकर रह जाता है । (चित्र: दरिद्र योग) टिप्पणी : हस्तरेखा के विद्वानों ने ऊपर लिखे योग के अतिरिक्त निम्न योगों को भी दरिद्र योग माना है । १. यदि हथेली मे सूर्य रेखा तथा भाग्य रेखा अत्यन्त कमजोर या टूटी हुई हो ।