भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( २१७ ) ३. बचपन में दुर्बलता : यदि जीवन रेखा बहुत अधिक मोटी हो और गुरु पर्वत के नीचे जंजीरदार हो गई हो । ४. वंशगत रोग : जहां से जीवन रेखा प्रारम्भ हो रही हो वहीं पर द्वीप का चिह्न हो तो उस व्यक्ति को वंशगत रोग होता है । ५. कमजोर शरीर : यदि जीवन रेखा सीढ़ीदार तथा टूटी हुई हो । ६. बचपन में दुर्घटना : यदि भाग्य रेखा के प्रारम्भ में कोई बिन्दु का चिह्न हो । ७. अविकसित शरीर : यदि जीवन रेखा के बीच में कई शाखाएं नीचे की ओर बढ़ी हों तथा वह टूटी हुई हो । ८. बुढ़ापे में कमजोरी : यदि स्वास्थ्य रेखा चौड़ी हो और अन्त में वह जाकर गुच्छेदार हो गई हो अथवा टूट गई हो । ६. आकस्मिक मृत्यु :-यदि हृदय रेखा शनि पर्वत के नीचे जाकर अचानक से दिखाई देती हो या मस्तिष्क रेखा मणिबन्ध को स्पर्श करती हो । १०. हत्या : यदि जीवन रेखा मस्तिष्क रेखा तथा हृदय रेखा अपने प्रारम्भिक स्थान पर परस्पर पूरी तरह से जुड़ी हुई हो और जंजीरदार हो गई हो । ११. पशु से दुर्घटना : यदि मस्तिष्क रेखा सूर्य पर्वत के नीचे या शनि पर्वत के नीचे अचानक टूट गई हो । १२. सिर पर चोट : यदि मस्तिष्क रेखा पर लाल रंग के तारे का चिह्न हो । १३. यौवनकाल में भयंकर दुर्घटना :-यदि मस्तिष्क रेखा नीचे की ओर झुकी हुई हो तथा लहरदार दिखाई देती हो । १४. फांसी : यदि जीवन रेखा बीच में ही एकाएक समाप्त हो गई हो और हृदय रेखा, मस्तिष्क रेखा तथा जीवन रेखा से बने हुए त्रिकोण में क्रास या दो तारक चिह्न हों । १५. कारावास : यदि भाग्य रेखा के प्रारम्भ में कई रेखाएं निकल कर नीचे की ओर जा रही हों और वह भाग्य रेखा मध्यमा के दूसरे पौर तक पहुंच गई हो । १६. जल में मृत्यु : यदि चन्द्र पर्वत पर वृत्त का चिह्न हो अथवा चन्द्र पर्वत पर त्रिकोण हो अथवा बुध पर्वत पर बिन्दु, त्रिकोण या तारक चिह्न हो ।