भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( २२८ ) २. यदि शुक्र पर्वत पर लाल रंग का तारक चिन्ह हो । ३. यदि विवाह रेखा पर द्वीप का चिन्ह हो । ४. यदि भाग्य रेखा पर क्रॉस हो । अनमेल विवाह : १. यदि सूर्य रेखा तथा विवाह रेखा आपस में काटती हो । २. यदि शुक्र पर्वत जरूरत से ज्यादा विकसित हो । व्यापारी से विवाह : यदि मणिबन्ध से शुक्र पर्वत को कोई रेखा जाती हो । २. यदि मणिबन्ध से कोई रेखा बुध पर्वत तक पहुंचती हो । ३. यदि सूर्य रेखा का शुक्र रेखा से सम्बन्ध हो । बूढ़े व्यक्ति से विवाह : १. यदि कोई रेखा मणिबन्ध से निकल कर शुक्र पर्वत तथा शनि पर्वत पर जाती हो । २. यदि हाथ कमजोर एवं संकीर्ण हो तथा भाग्य रेखा एवं प्रणय रेखा दूषित हो । विवाह में बाधा : १. यदि विवाह रेखा कई स्थानों पर कटती हो । २. यदि चन्द्र पर्वत पर आड़ी-तिरछी रेखाएं हों । ३. यदि शुक्र पर्वत पर दो तारक चिन्ह हो । तलाक : १. शुक्र रेखा से हृदय रेखा को कोई रेखा जाती हो । २. भाग्य रेखा पर द्वीप हो । ३. विवाह रेखा के अन्त में रेखाओं का गुच्छा हो । क्लीव योग : परिभाषा : १. यदि शुक्र पर्वत जरूरत से ज्यादा दबा हुआ हो । २. यदि हथेली में ‘गर्डल आफ वीनस’ हो तथा बुध रेखा का शनि रेखा से सम्बन्ध हो । ३. हथेली के बीच में त्रिकोण हो तथा उस पर बिन्दु हो । ४. शुक्र पर्वत पर पीले रंग का तारक चिन्ह हो । ५. चन्द्र पर्वत अत्यन्त कमजोर हो तथा उस पर त्रिकोण का चिन्ह हो । क्लीव योग ६. शनि रेखा तथा चन्द्र रेखा का परस्पर हो उंगलियां मध्यम आकार की हों ।