बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २२६ ) फल : क्लीव योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति कायर, कमजोर तथा नपुंसक होता है। वह काम कला में अपनी पत्नी को सन्तुष्ट नहीं कर पाता तथा उस पर पत्नी का व्यक्तित्व हावी रहता है। ऐसा व्यक्ति जोखिम भरे कार्यों से दूर रहता है तथा कोई भी नया कार्य करते समय मन ही मन हिचकिचाता रहता है। यह व्यक्ति लड़ाई झगड़ों में विश्वास नहीं करता तथा दूसरों की अधीनता में कार्य कर अपने जीवन को गुजार देता है। टिप्पणी : यदि हथेली में उत्तम राज योग अथवा पंचमहापुरुष योग में से भी कोई योग हो परन्तु उसके हाथ में क्लीव योग भी हो तो वह क्लीब योग उसके सभी श्रेष्ठ योगों का नाश कर देता है। ऐसा व्यक्ति अत्यन्त साधारण जीवन व्यतीत करने के लिए बाध्य होता है। दत्तक पुत्र योग : परिभाषा : यदि हथेली में शनि रेखा का मंगल रेखा से सम्बन्ध हो और ये दोनों ही पर्वत पूर्णतः विकसित हों तो दत्तक पुत्र योग बनता है। फल : दत्तक पुत्र योग रखने वाला व्यक्ति कुछ विशेष कारणों से लालचवश या पालन पोषण हेतु अथवा किसी अन्य कारण से दूसरे पुरुष की गोद चला जाता है। तथा उसके द्वारा उसे अपने पिता से अथवा उसके पिता को उसके द्वारा कोई विशेष सुख नहीं मिलता। टिप्पणी : गोद लेने की अथवा गोद देने की प्रथा दत्तक पुत्र भारतीय समाज में प्रचलित है। स्वयं के पुत्र न होने पर या पुत्र की मृत्यु हो जाने के कारण वह अपने संबंधियों में से ही किसी के पुत्र को गोद ले लेता है। और इस प्रकार वह उसकी सम्पत्ति का पूर्ण रूप से अधिकारी हो जाता है। मातृत्यक्त योग : परिभाषा : यदि मंगल सूर्य तथा चन्द्र रेखाएं परस्पर मिलती हों तथा सूर्य पर्वत अपने आप में कमजोर एवं दबा हुआ हो तो मातृत्यक्त योग बनता है। फल : जिस व्यक्ति की हथेली में मातृत्यक्त योग होता है उसके जन्म लेने के बाद उसकी माता किसी कारण से उस बालक को त्याग देती है तथा उसका जीवन अनाथ की तरह व्यतीत होता है। टिप्पणी : भारतीय समाज में कई बार कँआरी के पुत्र मातृत्यक्त हो जाने के कारण या विधवा हो जाने के बाद पुत्र हो जाने के