बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २७२ ) कुसुम योग : परिभाषा : यदि हथेली में सूर्य पर्वत अपने स्थान से खिसक कर शनि पर्वत में मिल गया हो तो कुसुम योग होता है। फल : कुसुम योग रखने वाला व्यक्ति विद्वान भाग्य- शाली तथा उच्च पद पर पहुंचने वाला माना गया है। ऐसे व्यक्ति के जीवन में कई आकस्मिक क्षण आते हैं जबकि वह जल्दी से जल्दी उन्नति करने में समर्थ होता है। ऐसे व्यक्ति के जीवन में किसी प्रकार की कोई न्यूनता नहीं रहती। [चित्र: कुसुम योग] अग्नि काण्ड योग : परिभाषा : यदि मंगल पर्वत पर क्रॉस का चिह्न हो तथा इस पर्वत से एक रेखा निकलकर राहू पर्वत पर जाती हो तो अग्निकाण्ड योग होता है। फल : जिसके हाथ में यह योग होता है उस व्यक्ति की मृत्यु आग से जलकर होती है। [चित्र: अग्निकाण्ड योग] मत्स्य योग : परिभाषा : यदि शुक्र पर्वत विकसित हो, अंगूठा पतला, लम्बा और थोड़ा सा पीछे झुका हुआ हो, साथ ही यदि सूर्य रेखा सीढ़ीदार हो तो मत्स्य योग होता है। फल : जिस व्यक्ति के हाथ में मत्स्य योग होता है वह सही भविष्यवक्ता, समय का पाबन्द तथा सद्गुणों से युक्त होता है। ऐसा व्यक्ति अपनी बुद्धि के द्वारा उन्नति करता है तथा जीवन में क्षमावान, दयावान तथा सद्गुण विवेक- [चित्र: मत्स्य योग] युक्त माना जाता है।