भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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पृष्ठ 274

( २७३ ) अग्रजघातक योग : परिभाषा : यदि हथेली मे राहू तथा हर्षल पर्वत पर त्रिकोण का चिह्न हो तो उसके जीवन में अग्रजघातक योग होता है । फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति अपने बड़े भाई से वैमनस्य रखता है अथवा उसकी हत्या कर देता है । अग्रजघातक कूर्म योग : परिभाषा : यदि हथेली में सूर्य रेखा स्पष्ट चन्द्र पर्वत से होती हुई जीवन रेखा के मध्य मिलती हो तथा भाग्य रेखा बलवान हो तो कूर्मयोग होता है । फल : कूर्म योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति अपने कार्यों से विख्यात तथा कीर्तिवान होता है । साथ ही ऐसा व्यक्ति विपत्ति मे धैर्य धारण करने वाला, भाषण देने में होशियार, दूसरों को प्रभावित करने वाला तथा राजा के समान जीवन व्यतीत करने वाला होता है । कूर्म योग आत्मघात योग : परिभाषा : यदि मध्यमा उंगली के सबसे निचले पौर पर तारक चिन्ह हो तो आत्मघात योग होता है । फल : जिसके हाथ में आत्मघात योग होता है उसकी मृत्यु स्वयं के प्रयत्नों से होती है और वह आत्महत्या करके मरता है । आत्मघात योग