भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( २७४ ) देवेन्द्र योग : परिभाषा : जिसके हाथ में कमल का चिह्न हो और विशेषकर ऐसा चिह्न जीवन रेखा के पास में चन्द्र पर्वत से कुछ हटकर हो परन्तु जिससे कोई प्रसिद्ध रेखा कटती न हो तो देवेन्द्र योग होता है । फल : जिसके हाथ में देवेन्द्र योग होता है वह ध्यमित सूझ-बूझ वाला तथा चतुराई से काम करने वाला होता है । वह आकर्षक व्यक्तित्व रखता है तथा सामने वाले व्यक्तियों को पूरी तरह से प्रभावित करने की क्षमता रखता है । ऐसा व्यक्ति दीर्घायु, शासन प्रिय, सुन्दर, कुशल, तथा दक्ष होता है । (चित्र: देवेन्द्र योग) खंग योग : परिभाषा : यदि हथेली मे बुध पर्वत अपने स्थान से खिसक कर सूर्य पर्वत मे मिल गया हो और सूर्य पर्वत अपने आप मे दृढ़ एवं श्रेष्ठ हो तो खंग योग होता है । फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह साधारण स्थिति में भी जन्म लेकर अत्यन्त ऊंचे स्तर तक पहुंचता है । ये जो भी बातें कहते हैं उसे अन्त समय तक निभाने का प्रयत्न करते है । ऐसे व्यक्ति भविष्य कथन करने मे भी श्रेष्ठ एव सफल होते हैं । आर्थिक दृष्टि मे इनके जीवन मे किसी प्रकार (चित्र: खंग योग) की कोई न्यूनता नहीं रहती । नवलक्ष्मी योग : परिभाषा : यदि हथेली में भाग्य रेखा, सूर्य रेखा तथा, बुध रेखा तीनों ही मणिबन्ध मे निकलती हों तथा सीधी, सरल और स्पष्ट हों तो नवलक्ष्मी योग होता है । फल : जिस व्यक्ति के हाथ में यह योग होता है वह अटूट सम्पत्ति का स्वामी, सम्पन्न, ऐश्वर्य युक्त तथा प्रसिद्धि प्राप्त होता है । (चित्र: नव लक्ष्मी योग)