भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 277, कुल 350 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 277

( २७६ ) कोटीश योग : परिभाषा : यदि हाथ में शनि वलय हो और वलय रेखा से छोटी-छोटी रेखाएं ऊपर की ओर उठ रही हों, साथ ही भाग्य रेखा मणिबन्ध से निकल कर शनि बिन्दु तक जाती हो तो कोटीश योग होता है । फल : जिसके हाथ में कोटीश योग होता है वह व्यक्ति जीवन में निश्चय ही करोड़पति होता है । कोटीश योग अरिष्ट योग : परिभाषा : यदि शनि पर्वत पर तारे का चिह्न हो तथा मध्यमा के सबसे ऊपरी पौर पर सफेद बिन्दु हो तो अरिष्ट योग होता है । फल : जिसके हाथ में अरिष्ट योग होता है वह जीवन में कई बार जादू, टोना, मन्त्र तंत्र, भूत प्रेत आदि से पीड़ित रहता है । अरिष्ट कलह योग : परिभाषा : यदि हथेली में चन्द्र पर्वत पर आड़ी तिरछी रेखाओं से जाल बना हो तो कलह योग होता है । फल : जिस व्यक्ति के हाथ में कलह योग होता है वह जीवन भर प्रत्येक से कलह करता रहता है तथा हर एक से उसका मानसिक असंतुलन बना रहता है । कलह