बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २७६ ) कोटीश योग : परिभाषा : यदि हाथ में शनि वलय हो और वलय रेखा से छोटी-छोटी रेखाएं ऊपर की ओर उठ रही हों, साथ ही भाग्य रेखा मणिबन्ध से निकल कर शनि बिन्दु तक जाती हो तो कोटीश योग होता है । फल : जिसके हाथ में कोटीश योग होता है वह व्यक्ति जीवन में निश्चय ही करोड़पति होता है । कोटीश योग अरिष्ट योग : परिभाषा : यदि शनि पर्वत पर तारे का चिह्न हो तथा मध्यमा के सबसे ऊपरी पौर पर सफेद बिन्दु हो तो अरिष्ट योग होता है । फल : जिसके हाथ में अरिष्ट योग होता है वह जीवन में कई बार जादू, टोना, मन्त्र तंत्र, भूत प्रेत आदि से पीड़ित रहता है । अरिष्ट कलह योग : परिभाषा : यदि हथेली में चन्द्र पर्वत पर आड़ी तिरछी रेखाओं से जाल बना हो तो कलह योग होता है । फल : जिस व्यक्ति के हाथ में कलह योग होता है वह जीवन भर प्रत्येक से कलह करता रहता है तथा हर एक से उसका मानसिक असंतुलन बना रहता है । कलह